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हाईकोर्ट की टिप्पणी : कोई भी सोशल मीडिया मंच भारतीय कानून से ऊपर नहीं, यह है पूरा मामला

Wed, 08 Jul 2026 01:19 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 08 Jul 2026 01:19 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोई भी सोशल मीडिया मंच भारतीय कानून और जांच एजेंसियों के प्रति जवाबदेही से नहीं बच सकता है। कानून का दायरा इतना व्यापक है कि किसी नियम का उल्लंघन होने पर दोषियों को न्याय के कठघरे तक ला सकता है।

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High Cours observation: No social media platform is above Indian law; here is the full story.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोई भी सोशल मीडिया मंच भारतीय कानून और जांच एजेंसियों के प्रति जवाबदेही से नहीं बच सकता है। कानून का दायरा इतना व्यापक है कि किसी नियम का उल्लंघन होने पर दोषियों को न्याय के कठघरे तक ला सकता है।

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यह तल्ख टिप्पणी न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में एक्स (पूर्व में ट्विटर) के अधिकारियों के जांच में सहयोग नहीं करने पर की। एक व्यक्ति ने गाजियाबाद के इंद्रापुरम थाने में दर्ज मामले की निष्पक्ष और जल्द जांच पूरी कराने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी।

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जांच अधिकारी ने हलफनामे के माध्यम से बताया कि एक्स ने उस खाते का यूआरएल, पहचान संबंधी विवरण, आईपी पता उपलब्ध नहीं कराया जिससे याची के कथित अश्लील वीडियो और तस्वीरें साझा की गई थीं। इससे जांच आगे नहीं बढ़ सकी और अतिरिक्त समय की आवश्यकता पड़ी।

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कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया मंच के अधिकारियों का पुलिस जांच में सहयोग न करना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रथम दृष्टया यह हलफनामा पुलिस व्यवस्था की विफलता स्वीकार करने जैसा प्रतीत होता है। एक ओर एक्स के अधिकारियों ने जांच में बाधा उत्पन्न की, वहीं दूसरी ओर पुलिस भी अपने वैधानिक दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं कर सकी।

जांच की धीमी प्रगति पर असंतोष जताते हुए कोर्ट ने गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। पूछा है कि एक्स के अधिकारियों का सहयोग सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए। कोर्ट ने आदेश की एक प्रति उत्तर प्रदेश के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को भेजने का आदेश दिया। अब 12 अगस्त को सुनवाई होगी।

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