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High Court : घटना स्थल पर मिली आरोपी की वस्तु से उसे दोषी साबित नहीं किया जा सकता

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 29 Apr 2026 12:15 PM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि घटना स्थल पर मिली आरोपी की वस्तु से उसे दोषी साबित नहीं किया जा सकता। इसी के साथ ट्रायल कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा पाए दोषी को बरी कर दिया।

High Court accused belongings found at the scene of the incident cannot prove his guilt.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि घटना स्थल पर मिली आरोपी की वस्तु से उसे दोषी साबित नहीं किया जा सकता। इसी के साथ ट्रायल कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा पाए दोषी को बरी कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने राम भवन हरिजन की आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए दिया।

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आरोपी राम भवन के खिलाफ प्रयागराज के थाना लालापुर में हत्या और सबूत मिटाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। 27 जुलाई 2021 को पांच साल की बच्ची घर के पास तालाब के किनारे खेलने गई थी और लापता हो गई। बाद में उसका शव बरामद हुआ। अभियोजन का आरोप था कि आरोपी राम भवन हरिजन ने बच्ची की हत्या कर शव को नहर में फेंक दिया। बच्ची जिस शाॅल में लिपटी हुई थी, वह आरोपी की थी। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है। पूरा केस परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है। तथाकथित शॉल की पहचान भी संदिग्ध है। पंचनामा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसका उल्लेख नहीं है। ऐसे में आरोपी को झूठा फंसाया गया है।

वहीं, शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी की पहचान उसकी शॉल से हुई और गवाहों ने अभियोजन के पक्ष का समर्थन किया है। आरोपी और वादी के बीच पूर्व में विवाद भी था जिससे हत्या का कारण स्पष्ट होता है। इसलिए ट्रायल कोर्ट का निर्णय सही है। हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में साक्ष्यों की कड़ी अधूरी है। शॉल की बरामदगी व पहचान पर गंभीर संदेह है। वस्तु की पहचान केवल सहायक साक्ष्य होती है, जिसके आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला निरस्त कर दिया। आदेश दिया कि यदि आरोपी किसी अन्य मामले में वांछित न हो तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।

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