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UP: पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण की संपत्तियों की बिक्री, वित्तीय लेनदेन पर रोक; कोर्ट के आदेश का पालन
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Tue, 28 Apr 2026 03:25 PM IST
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सार
महंत अग्रदास ने संस्था के सचिव के रूप में हाईकोर्ट के आदेश दिनांक 20 अगस्त 2025 के अनुपालन में संस्था के कार्यों और संपत्तियों की जांच कराए जाने की मांग की थी। महंत अग्रदास व अन्य ने आरोप लगाया था कि अखाड़ा की देशभर में स्थित संपत्तियों का अवैध विक्रय और अतिक्रमण किया जा रहा है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण से जुड़ी देशभर की सभी संपत्तियों की बिक्री और वित्तीय लेनदेन पर रोक लगा दी गई है। साथ ही पुराने जांच अधिकारी को हटाकर नए जांच अधिकारी की नियुक्ति हुई है। यह कार्रवाई प्रयागराज के कार्यालय रजिस्ट्रार फर्म्स सोसाइटीज एंड चिट्स के सहायक रजिस्ट्रार मनोज कुमार ने हाईकोर्ट के निर्देश के अनुपालन में की है।
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महंत अग्रदास ने संस्था के सचिव के रूप में हाईकोर्ट के आदेश दिनांक 20 अगस्त 2025 के अनुपालन में संस्था के कार्यों और संपत्तियों की जांच कराए जाने की मांग की थी। महंत अग्रदास व अन्य ने आरोप लगाया था कि अखाड़ा की देशभर में स्थित संपत्तियों का अवैध विक्रय और अतिक्रमण किया जा रहा है। उन्होंने सभी संपत्तियों की सुरक्षा, बैंक खातों से अनावश्यक निकासी पर रोक और संपत्तियों को प्रतिबंधित श्रेणी में डालने की मांग की थी।
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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सोसाइटी को निर्देश दिया था कि संस्था के मामलों की जांच तीन माह के भीतर पूरी की जाए। सोसाइटी ने नौ सितंबर 2024 के आदेश के तहत विवेक तिवारी एंड कंपनी को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। तीन माह में जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। तय समय में जांच आख्या प्रस्तुत नहीं की गई।
जांच में देरी का कारण अभिलेखों की अनुपलब्धता और विभिन्न भाषाओं (तेलुगु आदि) में दस्तावेज होने की बात कही गई और समय मांगा गया। अनुपालन में सोसाइटी के रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से कई बार पत्र जारी किए गए लेकिन जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई।
सहायक रजिस्ट्रार ने अपने आदेश में कहा कि विवेक तिवारी एंड कंपनी को जांच कार्य से हटा दिया गया है। नए जांच अधिकारी के रूप में वाराणसी के संदीप कुमार सिंह मेसर्स, वाराणसी के वीडी दूबे एंड एसोसिएट को नियुक्त किया जाता है। जांच पूरी होने तक संस्था की किसी भी चल-अचल संपत्ति की बिक्री या लीज पर रोक रहेगी।
बैंक खातों से केवल वेतन, बिजली, पानी जैसे आवश्यक खर्चों को छोड़कर सभी भुगतान पर रोक रहेगी। आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों, पदाधिकारियों और बैंकों को भेजकर जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।

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