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UP : अदालती प्रक्रिया को चकमा देने की कोशिश न करे पुलिस, अरेस्ट स्टे के बावजूद परेशान करने पर हाईकोर्ट सख्त

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 26 Apr 2026 02:44 PM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। कहा है कि पुलिस अदालती प्रक्रिया को चतुराई से मात देने का प्रयास न करे। यह तल्ख टिप्पणी न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत शुक्ला की खंडपीठ ने कविता चौहान की याचिका पर की।

Police should not try to circumvent the court process, High Court strict on harassment despite arrest stay
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। कहा है कि पुलिस अदालती प्रक्रिया को चतुराई से मात देने का प्रयास न करे। यह तल्ख टिप्पणी न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत शुक्ला की खंडपीठ ने कविता चौहान की याचिका पर की।

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याचिकाकर्ता ने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर कोर्ट को बताया कि गिरफ्तारी पर स्टे होने के बावजूद जांच अधिकारी उन्हें व्हाट्सएप पर संदेश और देर रात फोन कर प्रताड़ित कर रहे हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि किसी मामले में समय दिया गया है तो पुलिस का कर्तव्य है कि वह अगले आदेश की प्रतीक्षा करे या सरकारी अधिवक्ता के माध्यम से अदालत के निर्देशों की जानकारी ले।
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कोर्ट ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी पर रोक का अंतरिम आदेश पारित हो जाता है और कोई विपरीत आदेश नहीं होता तो उसके तकनीकी रूप से प्रभावी न होने की स्थिति में भी पुलिस की ओर से आरोपी का पीछा करना न्यायोचित नहीं है।

सरकारी अधिवक्ता से पुलिस को पूछना चाहिए कि कोर्ट ने क्या निर्देश दिया है, न कि स्वयं ही सक्रिय होकर गिरफ्तारी की योजना बनाए। सहारनपुर निवासी याचिकाकर्ता कविता चौहान ने कोर्ट को जानकारी दी कि उनके खिलाफ फर्जी प्राथमिकी उनके पति के प्रभाव में दर्ज कराई गई है। पति और उनके बीच वैवाहिक विवाद है। दहेज उत्पीड़न के मुकदमे में समझौते का दबाव बनाने के उद्देश्य से ही उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर द्वेषपूर्ण एफआईआर दर्ज कराई गई है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इन आरोपों को ठोस माना और कविता चौहान की गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। साथ ही पुलिस को निर्देश दिया कि उन्हें किसी भी प्रकार से प्रताड़ित न करे।

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