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UP : हाईकोर्ट का फैसला- पति की आय को आधार मान पत्नी और बेटे के गुजारा-भत्ता में की वृद्धि

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 12 Mar 2026 04:01 PM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय की ओर निर्धारित अंतरिम भरण-पोषण की राशि कम मानते हुए बढ़ा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने प्रीति तोमर चौधरी व उनके नाबालिग बेटे की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर दिया है।

High Court decides to increase the alimony allowance for wife and son based on the husband income
अदालत। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय की ओर निर्धारित अंतरिम भरण-पोषण की राशि कम मानते हुए बढ़ा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने प्रीति तोमर चौधरी व उनके नाबालिग बेटे की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर दिया है।

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मेरठ के परिवार न्यायालय ने नीरज कुमार चौधरी को पत्नी को 7,000 रुपये और बेटे को 5,000 रुपये प्रति माह देने का आदेश दिया था। इस आदेश को पत्नी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। तर्क था कि पति की वास्तविक आय 85,000 से 90,000 रुपये प्रति माह है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के रजनीश बनाम नेहा और अन्य मामलों के नजीर का हवाला देते हुए कहा कि भरण-पोषण भत्ता पति की शुद्ध आय के 25 प्रतिशत तक हो सकता है। अदालत ने अब 21,000 रुपये प्रति माह देने का निर्देश दिया है, जिसमें से 15,000 रुपये पत्नी को और 6,000 रुपये नाबालिग बेटे को मिलेंगे। 

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