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High Court : अधिकारियों ने ठेकेदारों के भरोसे छोड़ा एसआरएन अस्पताल...सात साल में नहीं बना बच्चों का विंग

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 12 Mar 2026 03:22 PM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल में प्रस्तावित चिल्ड्रेन वार्ड (विंग) के निर्माण का प्रोजेक्ट सात साल बाद भी पूरा नहीं होने पर कड़ी नाराजगी जताई है।

High Court Officials left SRN Hospital to the mercy of contractors...paediatric wing not built in seven years
एसआरएन अस्पताल। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल में प्रस्तावित चिल्ड्रेन वार्ड (विंग) के निर्माण का प्रोजेक्ट सात साल बाद भी पूरा नहीं होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कहा, इतने लंबे समय तक प्रोजेक्ट का अधूरा रहना सूबे के जिम्मेदार अधिकारियों की घोर उदासीनता को दर्शाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि इस महत्वपूर्ण परियोजना को पूरी तरह यूपी सिडको और ठेकेदारों के भरोसे छोड़ दिया गया है।

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यह टिप्पणी न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने डॉ. अरविंद गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। मामले में यूपी सिडको के प्रबंध निदेशक, मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और एसआरएन अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को 23 मार्च को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। कोर्ट ने उनसे पूछा है कि वे बताएं कि अस्पताल विस्तार के लिए प्रस्तावित 31,314 वर्ग मीटर भूमि के हस्तांतरण में आखिर देरी क्यों हो रही है। 
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कोर्ट ने कहा-दो से तीन महीने में काम पूरा करने का दिया जाता है भरोसा, फिर नई समय सीमा

बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं जैसे संवेदनशील विषय पर अधिकारियों की सुस्ती पर कोर्ट ने हैरानी भी जताई। कहा कि हर बार अदालत को दो-तीन महीने में काम पूरा करने का भरोसा दिया जाता है, लेकिन सात साल बाद भी परियोजना अधूरी है और अब फिर नई समय सीमा बताई जा रही है। ऐसा लगता है जैसे लखनऊ में बैठे बड़े अधिकारी इस परियोजना की निगरानी ही नहीं कर रहे हैं, न ही प्रयागराज की स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति गंभीर हैं। इसका नतीजा है कि मरीजों को इलाज के लिए लखनऊ और दिल्ली का रुख करना पड़ता है।

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