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High Court : मात्र पीड़ित के एससी-एसटी होने से एफआईआर का निर्देश अनिवार्य नहीं

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 12 Mar 2026 04:14 PM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर कि पीड़ित अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति वर्ग से है, विशेष अदालत या मजिस्ट्रेट के लिए एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश देना अनिवार्य नहीं है।

High Court: Merely because the victim is SC/ST, the direction of FIR is not mandatory
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर कि पीड़ित अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति वर्ग से है, विशेष अदालत या मजिस्ट्रेट के लिए एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश देना अनिवार्य नहीं है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अनिल कुमार-दशम की एकल पीठ ने आजमगढ़ निवासी कुसुम कनौजिया की आपराधिक अपील खारिज करते हुए की।

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याची ने पवन चौबे और चार अन्य के खिलाफ बरदह थाने में दर्ज मामले में विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी अधिनियम) की ओर से 19 जनवरी 2026 को पारित आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसका आवेदन खारिज कर दिया गया था।
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मामले में राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि एससी-एसटी एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो विशेष अदालत को आवेदन पर जांच करने से रोकता हो। अदालत ने दो बिंदुओं पर विचार किया। पहला, क्या विशेष अदालत को एससी-एसटी एक्ट के तहत आवेदन पर जांच का अधिकार है। दूसरा, क्या ट्रायल कोर्ट का निर्णय सही है।

कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में अदालत आरोपों का परीक्षण कर यह तय कर सकती है कि पुलिस से विवेचना कराई जाए या शिकायत के आधार पर कंप्लेंट केस चलाकर आगे की कार्यवाही की जाए। 

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