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High Court : चुनावी रंजिश में प्रधान पर हमले में दोषमुक्ति के खिलाफ सरकार की अपील खारिज

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 11 Jan 2026 02:09 PM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर के ब्लॉक प्रमुख चुनाव की रंजिश में प्रधान विक्रम सिंह पर जानलेवा हमले के आरोपियों की दोषमुक्ति के खिलाफ दाखिल राज्य सरकार की 40 साल पुरानी अपील खारिज कर दी।

High Court: Government appeal against acquittal in election rivalry attack on Pradhan dismissed
अदालत। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर के ब्लॉक प्रमुख चुनाव की रंजिश में प्रधान विक्रम सिंह पर जानलेवा हमले के आरोपियों की दोषमुक्ति के खिलाफ दाखिल राज्य सरकार की 40 साल पुरानी अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने दोषमुक्त करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले पर अपनी मुहर लगाते हुए कहा कि अभियोजन आरोपियों की विशिष्ट भूमिका साबित करने में असफल रहा। लिहाज, ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।

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यह फैसला न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह (प्रथम) की खंडपीठ ने सुनाया है। मामला गाजीपुर के नंदगंज थाना क्षेत्र के बसुचक और नैसरे गांव से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार अगस्त 1982 में ब्लॉक प्रमुख चुनाव की रंजिश में ग्राम प्रधान विक्रम सिंह पर जानलेवा हमला किया गया। आरोप था कि सुभाष और श्याम अवध ने विक्रम सिंह पर गोली चलाई, जबकि रंजीत, बलिराम व अन्य आरोपियों ने नैसरे गांव में दूसरे घायल राम शंकर सिंह के साथ मारपीट की। मुख्य आरोपी सुभाष और श्याम अवध को निचली अदालत ने पहले ही धारा-324 आईपीसी के तहत दोषी ठहराया था, जिसे बाद में जुर्माने में परिवर्तित कर दिया गया था। वहीं, बाकी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी।
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कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। कहा कि रंजीत और बलिराम जैसे आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस और विशिष्ट भूमिका साबित नहीं हो सकी। अभियोजन यह साबित करने में असफल रहा कि आरोपियों ने किसी समान उद्देश्य के साथ वारदात को अंजाम दिया था। अदालत ने घायल गवाह विक्रम सिंह की दूसरे घटनास्थल यानी नैसरे गांव में मौजूदगी को भी संदेहास्पद बताया। कहा कि गोली लगने, अधिक उम्र और बीमारी की स्थिति में नदी पार कर दूसरे गांव तक हमलावरों का पीछा करना सामान्य मानवीय आचरण के विपरीत प्रतीत होता है।

लिहाजा, कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया। सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि अपील के दौरान 10 में से छह आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, जिसके चलते उनके खिलाफ अपील पहले ही समाप्त हो चुकी थी। शेष आरोपियों के खिलाफ भी सरकारी अपील में कोई दम न पाते हुए हाईकोर्ट ने इसे गुणदोष के आधार पर खारिज कर दिया। 

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