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High Court : घर बनवाने के लिए मिला सरकारी खजाना, मिट्टी खोदने पर कोर्ट ने लगाया अर्थदंड

Wed, 19 Aug 2026 06:27 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 19 Aug 2026 06:27 PM IST
सार

सरकारी सहायता से बेटे के लिए घर बनवाने को जमीन समतल करना दो किसान भाइयों को भारी पड़ गया। खेत से मिट्टी निकालकर जमीन समतल करने पर फिरोजाबाद प्रशासन ने दोनों पर 66 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया।

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High Court: Government resources used for house construction; Court imposes fine for soil excavation.
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सरकारी सहायता से बेटे के लिए घर बनवाने को जमीन समतल करना दो किसान भाइयों को भारी पड़ गया। खेत से मिट्टी निकालकर जमीन समतल करने पर फिरोजाबाद प्रशासन ने दोनों पर 66 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया। किसानों ने जुर्माने को चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने सीधे जुर्माना रद्द करने के बजाय उन्हें राज्य सरकार के समक्ष पुनरीक्षण दाखिल करने की छूट देते हुए याचिका निस्तारित कर दी।

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यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा, न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने नाहर सिंह व जसवंत सिंह की याचिका पर दिया है। मामला फिरोजाबाद की जसराना तहसील के धर्मपुर गांव के दो सगे किसान भाइयों का है। दोनों गरीब किसान हैं। अपनी कृषि भूमि पर खेती कर परिवार का पालन पोषण करते हैं।
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नाहर सिंह के बेटे को राज्य सरकार की ओर से मकान बनाने के लिए आर्थिक सहायता स्वीकृत हुई। मकान बनाने के लिए जमीन को समतल करने की जरूरत पड़ी तो किसानों ने अपने खेत से कुछ मिट्टी निकालकर ढलान को समतल किया। किसी ने मिट्टी खनन को लेकर इनकी शिकायत कर दी। इसके बाद प्रशासन ने निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर दोनों पर 66 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया। दोनों ने पहले आगरा के मंडलायुक्त की अदालत में अपील की पर राहत नहीं मिली। इसके खिलाफ इन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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याची बोले-गरीब किसान हैं, कानून नहीं जानते

याची किसानों ने दलील दी कि वे गरीब किसान हैं। उन्हें खनन संबंधी कानून की जानकारी नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने निर्धारित सीमा से अधिक मिट्टी नहीं निकाली है। अधिकारियों का सत्यापन भी उनकी जानकारी के बिना किया गया था।

सरकार बोली : याचिका पोषणीय नहीं

सरकार के स्थायी अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिका पोषणीय नहीं है। मंडलायुक्त के आदेश के खिलाफ याचियों के पास पुनरीक्षण का वैकल्पिक उपचार उपलब्ध है।

कोर्ट ने कहा-भरोसा रखें, सही कानूनी विकल्प अपनाएं

कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि याचियों को किसान के रूप में खेती करते हुए पाया गया। उनके परिवार को राज्य सरकार की आवासीय सहायता के लिए पात्र भी माना गया। किसानों ने यह भी कहा कि उन्हें कानून की पूरी जानकारी नहीं थी। इसी कारण उन्होंने घर बनाने के लिए जमीन समतल करने को मिट्टी निकाली। कोर्ट ने जुर्माने पर गुण-दोष पर कोई अंतिम फैसला नहीं देते हुए याचिका निस्तारित कर दी। कहा कि याची कानून पर भरोसा रखें। सही कानूनी विकल्प के रूप में मंडलायुक्त के आदेश के खिलाफ उन्हें पुनरीक्षण याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता होगी। वे पुनरीक्षण याचिका के साथ इस आदेश की प्रतिलिपि भी लगा सकते हैं।

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