High Court : हथियार लाइसेंस में देरी के मामले में हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से मांगा डाटा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हथियार लाइसेंस देने में देरी और बिना कारण आदेश पारित करने के मामले में अपर मुख्य सचिव (गृह) से आर्म्स लाइसेंस की स्थिति पर विस्तृत डाटा मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि क्या राज्य में कोई स्पष्ट आर्म्स पॉलिसी है या नहीं।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हथियार लाइसेंस देने में देरी और बिना कारण आदेश पारित करने के मामले में अपर मुख्य सचिव (गृह) से आर्म्स लाइसेंस की स्थिति पर विस्तृत डाटा मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि क्या राज्य में कोई स्पष्ट आर्म्स पॉलिसी है या नहीं। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने जय शंकर उर्फ बैरिस्टर की याचिका पर की है।
भदोही निवासी याची ने 2018 में हथियार लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। जिलाधिकारी ने करीब चार साल बाद 24 नवंबर 2022 को आवेदन खारिज कर दिया। याची ने इसके खिलाफ मिर्जापुर मंडल के अपर आयुक्त के समक्ष अपील दायर की। तीन साल बाद नवंबर 2025 में बिना कारण बताए आवेदन खारिज कर दिया गया, जिसे याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
अधिवक्ता ने दलील दी कि याची सोने के आभूषण का व्यवसाय करता है, जिससे उसे सुरक्षा का खतरा रहता है। उसके खिलाफ दर्ज पांच मामलों में से चार में वह बरी हो चुका है और एक मामला लंबित है। शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि याची के खिलाफ पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें कुछ लंबित हैं और एक में अंतिम रिपोर्ट स्वीकार नहीं हुई है। ऐसे में उसके आपराधिक इतिहास को ध्यान में रखकर लाइसेंस आवेदन खारिज किया गया।
कोर्ट ने जिलाधिकारी भदोही से पूछा कि आवेदन पर चार साल की देरी क्यों हुई और नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया। अपर आयुक्त (अपीलीय प्राधिकारी) को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर बताना होगा कि देरी से दाखिल अपील बिना कारण कैसे स्वीकार की गई। साथ ही यह भी बताने को कहा कि अपील पर समय से फैसला क्यों नहीं लिया गया।
कोर्ट ने हथियार लाइसेंस मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर मुख्य सचिव (गृह) से पूछा कि क्या राज्य में आर्म्स लाइसेंस का डिजिटल डाटाबेस है। लाइसेंस देने में क्या प्रशासनिक बाधाएं हैं। कोर्ट ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस प्रमुखों को निर्देश दिया कि जिले और थानेवार हथियार लाइसेंस का पूरा ब्योरा दें। एक ही परिवार में कितने लोगों के पास लाइसेंस हैं, इसकी भी जानकारी दें। लंबित आवेदनों और अपीलों का डाटा प्रस्तुत करें, साथ ही दो या अधिक आपराधिक मामलों वाले लाइसेंस धारकों की अलग सूची तैयार करें।
शक्ति प्रदर्शन और सामाजिक प्रभाव का प्रतीक बना हथियार रखना : कोर्ट
कोर्ट ने टिप्पणी की कि कई जगह हथियार रखना शक्ति प्रदर्शन और सामाजिक प्रभाव का प्रतीक बन गया है। सोशल मीडिया पर हथियारों का प्रदर्शन और राजनीतिक प्रभाव के लिए उनका उपयोग समाज में भय का माहौल पैदा करता है, जो कानून के खिलाफ है। कोर्ट ने आदेश की प्रति राज्य के सभी जिलाधिकारियों, पुलिस प्रमुखों और संबंधित अधिकारियों को भेजने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को होगी।