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High Court : बिना उचित नोटिस और सुनवाई के नहीं होगा मकानों का ध्वस्तीकरण
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 28 May 2026 07:47 PM IST
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सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिना उचित नोटिस और सुनवाई के नहीं होगा मकानों का ध्वस्तीकरण। कोर्ट ने कहा कि ध्वस्तीकरण से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिना उचित नोटिस और सुनवाई के नहीं होगा मकानों का ध्वस्तीकरण। कोर्ट ने कहा कि ध्वस्तीकरण से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है। याचियों को पहले नोटिस दिया जाए। जवाब मिलने के बाद उनको सुनवाई का पूरा मौका दिया जाए। सक्षम अधिकारी जिन दस्तावेजों पर भरोसा कर आदेश पारित करेंगे वह भी याचियों को देंगे। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने विजय कुमार और 21 अन्य की याचिका पर दिया है।
चंदौली निवासी याचियों का मकान मुगलसराय के ग्राम कुढ़कला, परगना मवई में आराजी संख्या 38/1 पर स्थित है। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि उक्त भूमि उन्होंने पंजीकृत बिक्री विलेख के माध्यम से खरीदा है। वे अपनी संपत्ति के कानूनी स्वामी हैं और उनका कब्जा वैध है। उन्होंने याचिका दायर कर मकानों का न गिराने का निर्देश देने की हाईकोर्ट से मांग की।
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वहीं, राज्य सरकार के वकील ने याची के दावों को खारिज करते हुए दलील दी कि आराजी संख्या 38/1 पर कोई भी निर्माण नहीं है। इस भूमि का उपयोग सड़क के रूप में किया जा रहा है। कुछ याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी किए गए थे और कुछ ने उनका जवाब भी दिया है। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि नोटिस की प्रक्रिया पूर्ण नहीं थी। नए सिरे से नोटिस तामील कराने और याचियों का पक्ष सुनने का हाईकोर्ट ने निर्देश दिया।