Jagriti Shukla Death Case : जिनकी कलाइयों में बांधी राखी, उन्हीं के कंधों पर तय की अंतिम यात्रा
जिन दो छोटे भाइयों की कलाई पर अधिवक्ता जागृति शुक्ला राखी बांधा करती थीं, मंगलवार को उन्हीं के कंधों पर सवार होकर दुनिया से अपनी अंतिम यात्रा तय की।
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जिन दो छोटे भाइयों की कलाई पर अधिवक्ता जागृति शुक्ला राखी बांधा करती थीं, मंगलवार को उन्हीं के कंधों पर सवार होकर दुनिया से अपनी अंतिम यात्रा तय की। जागृति के छोटे भाई अभिषेक और ओम ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उन्हें लाडली बहन को घर से ऐसे बेजान शरीर में विदा करना होगा। बहन का शव उठाने में दोनों के हाथ कांप रहे थे।
भाइयों के साथ ही पिता पंकज शुक्ला ने भी कंधा दिया। बुढ़ापे में बेटी का पार्थिव शरीर उठाते वक्त मानो उन पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। अंतिम विदाई देते वक्त उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मुखाग्नि पिता ने दी। मां उमा शुक्ल तो घर में ही बेसुध पड़ी रहीं।
जागृति के पार्थिव शव का अंतिम संस्कार दारागंज के श्मशान घाट पर किया गया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में हाईकोर्ट के अधिवक्ता मौजूद रहे। लखनऊ के एसजीपीजीआई में उपचार के दौरान जागृति की मौत के बाद सोमवार शाम 5:30 बजे शव घर पहुंचा था। मंगलवार सुबह सात बजे उनकी अंतिम यात्रा दारागंज श्मशान घाट के लिए शुरू हुई।
मूलरूप से फूलपुर के वीरकाजी गांव निवासी पवन शुक्ला पिछले डेढ़ दशक से झूंसी के तुलापुर गांव में रह रहे हैं। पवन शुक्ला अलोपीबाग स्थित सिंधु विद्या मंदिर स्कूल में वाहन चालक हैं। उनके तीन बच्चों में जागृति सबसे बड़ी थीं। सीएमपी डिग्री कॉलेज से एलएलबी की परीक्षा पास करने के बाद जागृति हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रही थीं। दो भाइयों में इकलौती बहन होने के कारण पूरे परिवार की लाडली थीं। उनका सपना सिविल जज बनकर माता-पिता के सपने को साकार करना था। 20 मई की सुबह हुए हादसे की वजह से जागृति के परिवार के सपने हमेशा के लिए यादों में दफन हो गए।
पिता को रिश्तेदारों ने संभाला
पिता पवन शुक्ला तो यह कहकर बिलख पड़े कि जिस बिटिया को डोली में विदा करना था, उसके शव को कंधा देना पड़ रहा है। रिश्तेदारों ने उन्हें संभाला। दादा रविंद्र और दादी निर्मला शुक्ला ने भी पोती को भारी मन से विदा किया।
कई थानों की पुलिस रही तैनात
दारागंज श्मशान घाट पर हाईकोर्ट बार के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंह, महासचिव अखिलेश शर्मा, उपाध्यक्ष अमित सिंह सोनू, राय साहब यादव, रवि श्रीवास्तव, धर्मेंद्र श्रीवास्तव, आलोक मिश्र, राज सिंह आदि मौजूद रहे। सुरक्षा के लिहाज से एसीपी झूंसी कुंजलता के साथ ही कई थानों की पुलिस फोर्स दारागंज श्मशान घाट पर मौजूद रही।