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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: No one can be convicted based on the indications of a sniffer dog; life sentence set aside.

High Court : खोजी कुत्ते के संकेतों के आधार पर किसी को नहीं ठहराया जा सकता दोषी, उम्रकैद की सजा रद्द

Fri, 03 Jul 2026 12:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 03 Jul 2026 12:00 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल स्निफर डॉग (खोजी कुत्ते) के संकेतों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। डॉग ट्रैकिंग को साक्ष्य के रूप में पेश किया जाता है तो ट्रैकिंग पंचनामा और डॉग हैंडलर की गवाही जरूरी है।

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High Court: No one can be convicted based on the indications of a sniffer dog; life sentence set aside.
खोजी कुत्ता। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल स्निफर डॉग (खोजी कुत्ते) के संकेतों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। डॉग ट्रैकिंग को साक्ष्य के रूप में पेश किया जाता है तो ट्रैकिंग पंचनामा और डॉग हैंडलर की गवाही जरूरी है।

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इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा रद्द करते हुए आरोपियों को बरी कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर व न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने दिया है। मामला आगरा के थाना कागरौल क्षेत्र का है। 14 अक्तूबर 1998 की रात सुखपाल उर्फ मुन्ना घर से निकला था। अगले दिन उसका शव गांव के पास एक खेत में मिला। पुलिस स्निफर डॉग के साथ मौके पर पहुंची। उसके संकेतों के आधार पर पुलिस ने अपनी रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद पुनर्विवेचना के बाद सीबीसीआईडी ने भंवर सिंह, बेनीराम, ओमप्रकाश और कप्तान सिंह के खिलाफ हत्या का आरोपपत्र दाखिल किया।
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ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2020 में इन चारों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि अभियोजन का पूरा मामला विरोधाभासों से भरा हुआ है। एक ओर एफआईआर में तीन अलग लोगों को आरोपी बनाया गया। वहीं, सीबीसीआईडी की जांच में चार अन्य लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया।

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अधिकांश गवाह नहीं थे प्रत्यक्षदर्शी

अधिकांश गवाह प्रत्यक्षदर्शी नहीं थे। उनके बयान गांव में फैली अफवाहों पर आधारित थे। अदालत ने कहा कि अभियोजन स्पष्ट नहीं कर पाया कि वास्तविक आरोपी कौन है। साथ ही कोर्ट ने स्निफर डॉग से जुड़े साक्ष्यों को भी मानने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि स्निफर डॉग जांच एजेंसियों के लिए जांच में सहायक हो सकते हैं लेकिन उनकी गतिविधियों को किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि का स्वतंत्र और निर्णायक आधार नहीं बनाया जा सकता।

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