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UP : हाईकोर्ट ने रिमांड आदेश किया रद्द, कहा- गिरफ्तारी का आधार न बताना असांविधानिक

Mon, 03 Aug 2026 03:52 PM IST
vinod kumar singh विनोद सिंह
Updated Mon, 03 Aug 2026 03:52 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल के गुन्नौर थाना क्षेत्र से जुड़े एक मामले में याची राकेश की गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए 20 अप्रैल 2025 को जारी रिमांड आदेश रद्द कर दिया है।

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High Court quashes remand order; states that failure to disclose grounds for arrest is unconstitutional
कोर्ट का आदेश। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल के गुन्नौर थाना क्षेत्र से जुड़े एक मामले में याची राकेश की गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए 20 अप्रैल 2025 को जारी रिमांड आदेश रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी का विशिष्ट आधार बताना अनिवार्य है और यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उसका मौलिक अधिकार है। गिरफ्तारी का आधान न बताना असांविधानिक है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने दिया है।

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मामले में शिकायतकर्ता ने 18 अप्रैल 2025 को एफआईआर दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसकी पत्नी को बहला-फुसलाकर ले गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म और मानव तस्करी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार किया। याची ने गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
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याची अधिवक्ता ने दलील दी कि गिरफ्तारी मेमो में केवल ‘गिरफ्तारी का कारण’ दर्ज किया गया लेकिन गिरफ्तारी का ठोस और विशिष्ट आधार नहीं बताया गया। अदालत ने पाया कि जनरल डायरी की प्रविष्टि में भी केवल धाराओं का उल्लेख था और रिमांड मजिस्ट्रेट ने संविधानिक प्रावधानों के अनुपालन की जांच किए बिना यांत्रिक ढंग से रिमांड दे दी। अदालत ने राज्य सरकार की आपत्तियां खारिज करते हुए राकेश को निजी मुचलका भरने पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही संभल के सत्र न्यायाधीश को अधीनस्थ मजिस्ट्रेटों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा है।
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क्या है अनुच्छेद 22(1)

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 22(1) गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी का कारण जानने का अधिकार और अपनी पसंद के वकील से सलाह लेने का अधिकार देता है।

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