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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court says police stations have become hubs for commercial activities; DGP to conduct an inquiry.

UP : हाईकोर्ट ने कहा- व्यावसायिक गतिविधियों का अड्डा बने हैं थाने, डीजीपी करें जांच

Fri, 31 Jul 2026 11:36 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 31 Jul 2026 11:36 AM IST
सार

Allahabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य के कई थाने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र बनते जा रहे हैं। कोर्ट ने रसड़ा थाने के मामले में डीजीपी और अपर मुख्य सचिव (गृह) को जांच कर दोषी पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

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High Court says police stations have become hubs for commercial activities; DGP to conduct an inquiry.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उप्र पुलिस विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और पुलिसकर्मियों की व्यावसायिक गतिविधियों पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि राज्य के पुलिस थाने अब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय व्यावसायिक गतिविधियों के अड्डे बनते जा रहे हैं।

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इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने डीजीपी और अपर मुख्य सचिव (गृह) को रसड़ा थाने की जांच कर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने बलिया निवासी हरेंद्र यादव की याचिका पर दिया है। याची ने सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ), बलिया की ओर से उनके ट्रक को ब्लैकलिस्ट कर उसके हस्तांतरण पर रोक लगाने के खिलाफ याचिका दायर कर चुनौती दी थी।

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सुनवाई के दौरान सामने आया कि रसड़ा थाने में तैनात कांस्टेबल संतोष कुमार ने अपने जीपीएफ से धन निकालकर याची हरेंद्र यादव के नाम पर एक ट्रक खरीदा था। दोनों के बीच ट्रांसपोर्ट का कारोबार शुरू किया गया लेकिन बाद में व्यावसायिक विवाद होने पर पुलिस विभाग के प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि रसड़ा थाने के उपनिरीक्षक शिव मूर्ति तिवारी ने एआरटीओ को रिपोर्ट भेजी, जिसके आधार पर ट्रक को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया और उसके हस्तांतरण पर रोक लगा दी गई।

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यही स्थिति रही तो कानून-व्यवस्था बनाए रखना हो जाएगा कठिन

कोर्ट में सरकारी सेवा में रहते हुए व्यापार करने वाले सिपाही के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई न करने और उसे संरक्षण देने के प्रयास पर चिंता जताई। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस थाने अब व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र बनते जा रहे हैं। पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के अपने मूल दायित्व को छोड़कर व्यापारिक गतिविधियों में लगे हुए हैं।

यही स्थिति रही तो राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना कठिन हो जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि पूरा रसड़ा थाना ही व्यावसायिक गतिविधियों में संलिप्त है। अदालत ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को आदेश की प्रति 48 घंटे के भीतर संबंधित अधिकारियों को भेजने तथा डीजीपी को दस दिनों के भीतर की गई कार्रवाई का शपथ-पत्र दाखिल करने का आदेश दिया है।

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