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UP : देवरिया बस स्टैंड निर्माण में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, आदेश के बावजूद कैबिनेट मंजूरी नहीं

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 11 Jan 2026 02:06 PM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया बस स्टैंड के निर्माण में ढिलाई पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने निर्देश के बावजूद कैबिनेट स्तर पर कोई ठोस प्रगति नहीं होने पर राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता को अंतिम अवसर देते हुए चेतावनी दी है कि आदेश का पालन न होने पर सख्त कार्रवाई होगी।

High Court strict on delay in construction of Deoria bus stand, no cabinet approval despite order
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया बस स्टैंड के निर्माण में ढिलाई पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने निर्देश के बावजूद कैबिनेट स्तर पर कोई ठोस प्रगति नहीं होने पर राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता को अंतिम अवसर देते हुए चेतावनी दी है कि आदेश का पालन न होने पर सख्त कार्रवाई होगी। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने अधिवक्ता प्रदीप कुमार पांडेय की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

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याचिका में कहा गया था कि यात्रियों की संख्या बढ़ रही है पर अब तक स्थायी और आधुनिक बस स्टैंड का निर्माण नहीं हो सका है। हाईकोर्ट ने एक सितंबर 2025 को पारित आदेश में कहा था कि बस स्टैंड के निर्माण में देरी लाल फीताशाही की वजह से हो रही है। जबकि, बस स्टैंड की आवश्यकता को लेकर कोई विवाद नहीं है। राज्य सरकार की ओर से पेश शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी थी कि बस स्टैंड का प्रस्ताव राज्य कैबिनेट की मंजूरी के लिए लंबित है। दिसंबर 2025 तक स्वीकृति मिलने की संभावना है। यह भी बताया गया था कि मंजूरी के बाद विभिन्न औपचारिकताओं के कारण निर्माण पूरा होने में लगभग साढ़े तीन वर्ष लग सकते हैं।

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साथ ही शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी थी कि 2021-22 में एक अस्थायी शेड का निर्माण किया गया है। वहीं, दूसरा शेड निर्माणाधीन है जिसे अक्तूबर 2025 तक पूरा किया जाना था। कोर्ट ने मामले में कैबिनेट मंजूरी को पहला महत्वपूर्ण चरण मानते हुए अगली सुनवाई आठ जनवरी 2026 को तय की थी और अस्थायी शेड का कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए थे।

आठ जनवरी 2026 को सुनवाई में सरकारी पक्ष कैबिनेट मंजूरी के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सका। यूपीएसआरटीसी की ओर से यह जरूर बताया गया कि केंद्र सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को पीपीपी परियोजनाओं के लिए नया मॉडल आरएफपी जारी किया है और फरवरी 2026 में विज्ञापन जारी करने की तैयारी है।

इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एक सितंबर 2025 के आदेश के बावजूद कोई ठोस कदम न उठाया जाना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए एक बार फिर अंतिम मौका दिया। कहा कि यदि आदेश का अनुपालन नहीं हुआ तो न्यायालय को कठोर कदम उठाने पड़ेंगे। मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी 2026 को होगी।

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