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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Husbands and wives should not use their children as pawns in their disputes; it is a cruel mockery of their ch

High Court : पति-पत्नी अपनी लड़ाई में बच्चों को मोहरा न बनाएं, उनके बचपन के साथ क्रूर खिलवाड़

Sat, 11 Jul 2026 06:35 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 11 Jul 2026 06:35 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मम्मी-पापा की लड़ाई में बच्चों को मोहरा नहीं बनाया जा सकता। यह उनके बचपन के साथ क्रूर खिलवाड़ है।

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Husbands and wives should not use their children as pawns in their disputes; it is a cruel mockery of their ch
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मम्मी-पापा की लड़ाई में बच्चों को मोहरा नहीं बनाया जा सकता। यह उनके बचपन के साथ क्रूर खिलवाड़ है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति संदीप जैन की अदालत ने डाॅक्टर पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर उस वक्त की, जब मां के साथ रह रही पांच साल की बेटी अदालत में पेश हुई। अदातल से बातचीत में उसने कहा पापा गंदे है। यौन उत्पीड़न करते है। मम्मी को भी मारते है। इनके साथ नहीं रहना चाहती।

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यह सुन हैरान कोर्ट ने माना कि बेटी का यह बयान और उसे पेश करने का तरीका उसकी उम्र और समझ से कहीं आगे हैं। मां ने उसे मोहरे की तरह इस्तेमाल किया। उसे ऐसी बातें सिखाई गई हैं, जो उसके मानसिक विकास और भविष्य के लिए बेहद खतरनाक है। लिहाजा, कोर्ट ने कहा कि बेटी मां संग नहीं रह सकती। बेटी पिता के साथ ही रहेगी। मां उससे मिलने पिता के घर जा सकती है। वीडियो कॉल पर बातचीत कर सकती है। 17 अगस्त को हाेने वाली अगली सुनवाई पर पिता को बच्ची संग अदालत में पेश होना होगा।

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पिता की दलील

पिता के वकील ने दलील दी कि पहले कोर्ट ने पिता को वीडियो कॉल पर बातचीत करने का अधिकार दिया था। जबकि, मां बेटी को पिता से बात नहीं करने देती। बच्ची को उनके खिलाफ भड़काती हैं। उसे ऐसी आपत्तिजनक बातें सिखाई जा रही है, जो, उसके मानसिक और शारीरिक कल्याण के लिए ठीक नहीं है। अगर बच्ची मां के साथ रहती है तो वह निश्चित रूप से बिगड़ जाएगी। उसका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।

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मां की दलील

मां के पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि पति-पत्नी के बीच गंभीर वैवाहिक विवाद हैं। वे किसी भी हाल में साथ नहीं रह सकते। पति की ओर से पत्नी पर लगाए गए सभी आरोप निराधार और झूठे हैं। बच्ची की कम उम्र को देखते हुए उसे मां के पास ही रहने देना चाहिए।


पांच साल की बच्ची का मानसिक और शारीरिक कल्याण सर्वोपरि है। यदि वह लगातार नकारात्मक बातें सुनती रही तो इसका उसके भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। - हाईकोर्ट

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