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मोरारी बापू का अमर उजाला के साथ विशेष साक्षात्कार, कुंभ और राम मंदिर निर्माण को लेकर क्या है राय

Wed, 23 Jan 2019 08:04 PM IST
देव कश्यप मनोज मिश्र/ अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज
मनोज मिश्र/ अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: देव कश्यप Updated Wed, 23 Jan 2019 08:04 PM IST
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Kumbh Mela 2019 Murari Bapu interview, opinion about Ram Mandir Nirman
Morari Bapu

संगम तट पर कथा के लिए आए विख्यात मानस मर्मज्ञ संत मोरारी बापू कुंभ की मौजूदा व्यवस्थाओं को देखकर अभिभूत हैं। वह कहते हैं कि यहां ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। अमर उजाला से विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कुंभ और इसके अलावा तमाम समसामयिक सवालों पर अपनी राय रखी। मोरारी बापू  से मनोज मिश्र और अनूप ओझा की बातचीत के प्रमुख अंश...



प्रश्न : प्रयागराज में आप कथा के लिए पहले भी आते रहे हैं। इस बार यहां का वातावरण कैसा लग रहा है?
उत्तर: यह यज्ञ और कथा की ही भूमि है। यहां कथा का वातावरण युगों से है। दूसरी जगहों पर वातावरण बनाना पड़ता है। यहां वातावरण हमेशा से बना हुआ है। पहले दिन से ही भगवान की भक्ति का आनंद प्रवाहित होने लगता है।

प्रश्न: कुंभ के सांस्कृतिक-धार्मिक महत्व को अपनी दृष्टि से कैसे परिभाषित करेंगे?
उत्तर: रामकथा को गंगा, यमुना, लुप्त सरस्वती कहा गया है। इस ज्ञान रूपी अथाह गंगा, यमुना व सरस्वती का कोई एक साथ पान नहीं कर सकता। कुंभ माने समग्र शास्त्रों का सत्व-तत्व होता है। सत्व-तत्व का कुंभ में दान करके लोग धन्य होते हैं। कुंभ यानी अमृत कलश। हमारे यहां कुंभ शगुन का भी होता है। कुंभ बाहर से कठोर अंदर से खाली भी होता है। कुंभ के कई अभिप्राय हैं। वेदांत में कुंभ घटाकाश के रूप में यानी हृदय एक कुंभ है। कुंभ एक राशि भी है। कुंभ के भावों में गंगा और शिव समाहित हैं।

Kumbh Mela 2019 Murari Bapu interview, opinion about Ram Mandir Nirman
Morari Bapu

प्रश्न: आप हर बार कुंभ में आते रहे हैं। अबकी और पिछली बार के कुंभ में कोई खास परिवर्तन या अंतर नजर आया।
उत्तर। कुंभ में अच्छी से अच्छी सुविधा प्रदान करना प्रशासन का फर्ज है। कुंभ करोड़ों लोगों की श्रद्धा का केंद्र है। पिछली बार भी सुविधाएं तो मिलती थीं, लेकिन इस बार का कुंभ हर एक प्रकार से सर्वोपरि है। क्योंकि यह एक साधु का आयोजन है। साधु का आयोजन होने की वजह से भव्यता बढ़ गई है। राजनीति तो अपनी जगह है, लेकिन इस कुंभ पर साधु के त्याग, तेज और तप का प्रभाव है। बाहर की रोशनी के साथ तपस्या की रोशनी से कुंभ खास हो गया है।

प्रश्न: राम मंदिर को लेकर अध्यादेश लाना चाहिए या फिर कोर्ट के फैसले का इंतजार किया जाए?
उत्तर: मेरी नजर में ये है कि पहले तो मैं कोर्ट से विनती करूंगा कि शीघ्र और नियमित सुनवाई हो। जल्दी फैसला आ जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि एक बार कोर्ट फैसला सुना दे तो फिर सरकार को जो करना है, वह करेंगी। अदालत से मेरी विनती है कि जल्दी से इसका हल निकालें।

Kumbh Mela 2019 Murari Bapu interview, opinion about Ram Mandir Nirman
Morari Bapu

प्रश्न: कोर्ट के फैसले में देरी होती है तो?
उत्तर: देखिए, मेरे पास राजपाठ नहीं है। मैं व्यासपीठ पर हूं। कारण क्या है मैं नहीं जानता। मैं राजनीति से नहीं जुड़ा हूं। मुझे तो लगता है कि खास अवसर पर यह मुद्दा नहीं उछलना चाहिए। एक प्रवाहमान गति है यह। चुनाव न हो तो भी इस पर बात होनी चाहिए। कोर्ट के फैसले में देरी होती है तो सरकार इस पर सोचे।

प्रश्न: आपको लेकर कहा जाता है कि आप अपनी कथा में शेर सुनाते हैं, गीत सुनाते हैं। इससे कथा का स्तर गिरता है।
उत्तर: 'ठहाके के साथ' साहब, गंगा जल सोने के पात्र में ही पिया जाए? किसी गरीब के पास कुल्हड़ भी होता है। जो सत्य है उसको कभी मिट्टी के बर्तन में, कागज के बर्तन में, कभी कप में भी परोसा जाना चाहिए। मैं शेर क्यों सुनाता हूं यह नहीं, किस लिए सुनाता हूं, इसे लोगों को जानना चाहिए। सत्य जहां से मिले ले लेना चाहिए। रामायण में कहा गया है कि सबका समावेश करो। शास्त्र-पुराण तो हैं ही। गजल से, गीत से अच्छी पंक्ति मिल जाए तो उसे लेने में क्या हर्ज।

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Morari Bapu

प्रश्न: आप अपनी कथाओं में हमेशा प्रयोग करते रहे हैं। अयोध्या की कथा में सेक्स वर्करों को आमंत्रित किया था। काशी में डोमराज परिवार के सदस्यों के साथ प्रसाद ग्रहण किया था। कुंभ की कथा में क्या प्रयोग कर रहे हैं?
उत्तर: यहां संगम की कथा है। यहां सबको मिलाने की कथा हो रही है। पक्ष-विपक्ष को मिलाने की। विरोधियों को एक करने की कथा। मैं महापुरुषों के यहां जा रहा हूं। तीन-चार घंटे बिताता हूं। सफाईकर्मियों के पास मेरी गाड़ी रुकती है। सड़कों पर छोटे-छोटे बच्चों से मिल रहा हूं। इस कथा का संदेश है मेल।

प्रश्न: कुछ साधु-संन्यासी मानते हैं कि जो गेरुआ वस्त्र पहनते हैं, उनको राजनीति नहीं करनी चाहिए?
उत्तर: भारत स्वतंत्र देश है। संविधान में विचारों की स्वतंत्रता प्रदान की गई है। साधु कुछ ज्यादा स्वतंत्र होते हैं। बाकी, जिसको जो लगे कहता रहे।

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Morari Bapu

प्रश्न: राजस्थान, हरियणा, गुजरात में हुई भीड़ हिंसा (माब लीचिंग) की घटनाओं को आप किस रूप में देखते हैं?
उत्तर: किसी भी प्रकार की हिंसा के पक्ष में नहीं रहना चाहिए। हिंसा से कभी कोई हल नहीं आने वाला है। हल जब भी आएगा करुणा से प्रेम से, जो घटनाएं हुईं, वे दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

प्रश्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बारे में आपकी क्या राय है?
उत्तर: राजनीति में जो होते हैं, वह साम, दाम दंड भेद का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रभक्ति पर हम शंका नहीं कर सकते। बाकी तो सब राजनीति है। रही बात राहुल गांधी की तो वह भी कांग्रेस के लीडर हैं। काम कर रहे हैं। सबकी दृष्टि में राष्ट्र का कल्याण होना चाहिए। हिंदुस्तान में जन्मे हो, रहते हो और रोटी खाते हो तो कल्याण की भावना होनी चाहिए।

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