UP : सियासत की परीक्षा में फिर पास हुईं पूजा पाल, भाजपा ने दिया इनाम
पति विधायक राजू पाल की हत्या के बाद अतीक अहमद जैसे माफिया के खिलाफ न्याय की लड़ाई लड़ने वाली पूजा पाल की राजनीतिक हैसियत पर भाजपा ने मुहर लगा दी।
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पति विधायक राजू पाल की हत्या के बाद अतीक अहमद जैसे माफिया के खिलाफ न्याय की लड़ाई लड़ने वाली पूजा पाल की राजनीतिक हैसियत पर भाजपा ने मुहर लगा दी। पार्टी से उनकी नजदीकी तो लोकसभा चुनाव से ही थी लेकिन बृहस्पतिवार को भाजपा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाकर उसे सार्वजनिक कर दिया।
पूजा का यह कद यूं ही नहीं बढ़ा। लंबे राजनीतिक संघर्ष में उन्होंने अपनी सियासी जमीन तैयार की है। वर्ष 2005 में राजू पाल हत्याकांड के बाद राजनीति में सक्रिय हुईं पूजा पाल ने बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया और लगातार दो बार विधायक बनीं। बाद में उन्होंने बसपा का साथ छोड़ समाजवादी पार्टी का दामन थामा।
सपा ने 2022 में उन्हें कौशाम्बी के चायल विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया, जहां उन्होंने जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की। लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी नेतृत्व से मतभेद के बाद उन्होंने सपा से दूरी बना ली और भाजपा के साथ हो गईं। करीब दो दशक के राजनीतिक सफर में पूजा ने कई उतार-चढ़ाव देखे, दल बदले और नई रणनीतियों के साथ आगे बढ़ती रहीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सहानुभूति से शुरू हुई उनकी राजनीति आज संघर्ष, संगठन क्षमता और जनाधार के दम पर नए मुकाम तक पहुंच चुकी है।
अति पिछड़ों को साधने की कोशिश
भाजपा ने पूजा के जनाधार, संघर्षशील छवि और राजनीतिक अनुभव को महत्व देते हुए संगठन में पदाधिकारी बनाया, लेकिन पार्टी की निगाह पाल बिरादरी पर भी है। प्रयागराज और कौशाम्बी के लगभग हर विधानसभा क्षेत्र में इस बिरादरी का अच्छा खासा वोट है, जो चुनाव का रुख पलट सकता है। इस बहाने भाजपा ने अति पिछड़ों को भी साधने की कोशिश की।
मंत्री नहीं बनीं तो मायूस थे समर्थक, अब जश्न
चायल से विधायक पूजा पाल को भाजपा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनके समर्थकों और शुभचिंतकों में खुशी की लहर है। सोशल मीडिया पर बधाइयों का तांता लगा है। दरअसल, हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान पूजा पाल का नाम संभावित मंत्रियों की सूची में चर्चा में रहा था। उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि उन्हें सरकार में जगह मिलेगी। जब मंत्रिमंडल की सूची में उनका नाम शामिल नहीं हुआ तो समर्थकों में निराशा भी देखने को मिली थी। लेकिन समर्थकों की खुशी लौट आई है।
आत्मसम्मान पर लगी चोट तो छोड़ दी सपा: पूजा पाल
भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद चायल विधायक पूजा पाल ने सपा तीखा हमला बोला है। कहा कि सपा में रहते हुए उन्हें धीरे-धीरे अहसास हुआ कि वहां सम्मान सिर्फ दिखावे का है। आत्मसम्मान और अधिकारों की बात पर पार्टी आपके साथ खड़ी नजर नहीं आती।
पूजा ने कहा कि लंबे संघर्षों के बाद जब उन्हें न्याय मिला और उन्होंने अपनी बात रखनी चाही तो उन्हें चुप रहने की सलाह दी गई। अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए पूजा पाल ने कहा कि भाजपा मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जब कोई बातचीत ही नहीं हुई थी, तब उस पर व्यंग्य करना किसी बड़े नेता की गरिमा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि एक महिला विधायक पर लगातार तंज कसना महिलाओं के प्रति सपा की सोच को उजागर करता है।
प्रदेश उपाध्यक्ष बनने पर उन्होंने कहा कि यह पद उनके लिए सम्मान के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। वह भाजपा की विचारधारा और संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत बनाने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगी। 2027 के विधानसभा चुनाव एक बार फिर कमल खिलेगा।