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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Allahabad High Court's major ruling; stays government order appointing Gram Pradhans as administrators.

UP : पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के सरकार के आदेश पर लगाई रोक

Fri, 26 Jun 2026 02:59 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 26 Jun 2026 02:59 PM IST
सार

UP News : उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टालने के सरकारी फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। साथ ही प्रशासक नियुक्त  करने  के फैसले को सांविधानिक प्राविधानों के विपरीत बताया है। कहा कि जिन नियमों के तहत प्रशासक नियुक्त किया गया है वह उन नियमों को पहले ही असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 जुलाई की तिथि निर्धारित की गई है। 

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Allahabad High Court's major ruling; stays government order appointing Gram Pradhans as administrators.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पंचायत चुनाव में देरी को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए 25 मई 2026 और 26 मई 2026 के उन सरकारी आदेशों को 'गैर-मौजूद' (असंवैधानिक) करार दिया, जिनसे चुनाव टाले गए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये आदेश अधिनियम, 1947 की धारा 12 (3-ए) के तहत पारित किए गए थे, जिसे 'प्रमोद लाल पटेल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' मामले में उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने पहले ही असंवैधानिक घोषित कर दिया था।

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न्यायालय ने जोर दिया कि संविधान के अनुच्छेद 243 ई और 243 (के) के तहत पंचायतों का कार्यकाल पांच साल का निश्चित होता है और चुनाव समय पर होने चाहिए। राज्य सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने को देरी का कारण बताया, जिस पर कोर्ट ने हैरानी जताई कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद ओबीसी आयोग ने अब तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। राज्य चुनाव आयोग ने बताया कि मतदाता सूची 10 जून 2026 को प्रकाशित हो चुकी है और वे चुनाव कराने के लिए तैयार हैं, लेकिन राज्य सरकार से आवश्यक लॉजिस्टिक्स न मिलने के कारण चुनाव में बाधा आ रही है।

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13 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

न्यायालय ने प्रधानों को प्रशासक के रूप में जारी रखने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को अंतिम अवसर देते हुए एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और चुनाव कराने की स्पष्ट समय-सीमा का उल्लेख हो। यदि सरकार ऐसा करने में विफल रहती है, तो संबंधित प्रतिवादी संख्या दो (जिसने 25 मई 2026 का आदेश जारी किया था) को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना होगा कि असंवैधानिक प्रावधानों के तहत आदेश क्यों जारी किए गए। ऐसा न करने पर इसे प्रथम दृष्टया अवमानना माना जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को दोपहर दो बजे होगी।

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