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Prayagraj Magh Mela : अर्धनारीश्वर स्वरूप हैं किन्नर, करते हैं विशेष श्रृंगार, आराध्य हैं बहुचरा देवी

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 16 Jan 2026 02:10 PM IST
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सार

किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर कल्याणीनंद गिरि ने कहा कि किन्नरों को भगवान राम का आशीर्वाद प्राप्त है। भगवान राम ने किन्नरों को यह आशीर्वाद दिया है कि उनका दिया हुआ आशीर्वाद कभी खाली नहीं जाएगा और वे शुभ अवसरों पर लोगों को आशीर्वाद दे सकेंगे।

Prayagraj Magh Mela: Kinnars are in the form of Ardhanarishwar, do special make-up, worship Bahuchara Devi
कल्याणीनंद गिरि, महामंडलेश्वर किन्नर अखाड़ा। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर कल्याणीनंद गिरि ने कहा कि किन्नरों को भगवान राम का आशीर्वाद प्राप्त है। भगवान राम ने किन्नरों को यह आशीर्वाद दिया है कि उनका दिया हुआ आशीर्वाद कभी खाली नहीं जाएगा और वे शुभ अवसरों पर लोगों को आशीर्वाद दे सकेंगे। उनकी दुआएं फलित होंगी और उन्हें समाज में सम्मान मिलेगा, क्योंकि वे 14 साल तक वनवास के दौरान राम के साथ रुके थे और उनकी वापसी का इंतजार कर रहे थे। जिससे प्रसन्न होकर भगवान राम ने उन्हें यह वरदान दिया था। कल्याणीनंद गिरि अमर उजाला से विशेष बातचीत कर रही थीं।

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महामंडलेश्वर कल्याणीनंद गिरि ने कहा कि किन्नर धरती पर भगवान शिव और पार्वती के अर्धनारीश्वर स्वरूप के प्रतीक हैं। हम सभी देवताओं की पूजा करते हैं लेकिन किन्नररों की आराध्य बहुचरा देवी हैं। जिनकी विशेष पूजा किन्नर समुदाय के द्वारा की जाती है। बहुचरा माता किन्नरों की कुलदेवी हैं। किन्नर समाज के लोग बिना की पूजा और आशीर्वाद के कोई शुभ काम नहीं करते हैं। गुजरात के मेहसाणा जिले में बहुचरा माता का प्रसिद्ध मंदिर है, जहां पर नवरात्रि में श्रद्धालुओं की बहुत भीड़ होती है। किन्नर समाज की मान्यता है कि बहुचरा माता उनकी रक्षा करती हैं। लोक मान्यताओं के अनुसार बहुचरा माता का जन्म चारण परिवार में हुआ था। उनको हिंगलाज माता का अवतार माना जाता है। वे किन्नर समाज को सुरक्षा देने वाली देवी हैं। संतान प्राप्ति के लिए भक्त बहुचरा देवी की पूजा और आराधना करते हैं। 

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किन्रर करते हैं विशेष श्रृंगार

कल्याणनंद गिरि ने बताया कि किन्नर भी सामान्य तरीके से श्रृंगार करते हैं लेकिन विशेष श्रृंगार करने में एक घंटे से अधिक समय लगता है। किन्नरों का विशेष श्रृंगार उनके जीवन का अहम हिस्सा है। उनकी पहचान और पूजा पद्धति का प्रतीक है, जिसमें वे स्वयं को मंदिर मानकर भव्य रूप धारण करते हैं। वे सिंदूर, चूड़ियां, और आभूषण पहनते हैं, विशेषकर बहुचरा माता और अरावन देवता के सम्मान में। जिसमें उनकी पवित्रता, तपस्या और जन कल्याण की भावना झलकती है।

किन्नर अपने शरीर को एक पवित्र मंदिर मानते हैं और उसे भव्य रूप में रखते हैं, जो उनके श्रृंगार का आधार है। वे अपनी मांग में सिंदूर भरते हैं, जो उनके गुरु की लंबी आयु और उनके कुलदेवी के प्रति समर्पण का प्रतीक है। आभूषण, वस्त्र, चूड़ियों आदि विशेष प्रयोग अपने श्रृंगार में करते हैं। किन्नरों का श्रृंगार उनके गुरु और कुलदेवी के प्रति प्रेम और समर्पण को दर्शाता है। श्रृंगार और रूप लोगों को आशीर्वाद देने और शुभता लाने का एक माध्यम है। 

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