सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Prayagraj: Now the Constitution can also be sung on the lines of Ramcharit Manas.

Prayagraj: रामचरित मानस की तर्ज पर अब गाया भी जा सकेगा संविधान, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में उपलब्धि दर्ज

सोनाली सिंह, प्रयागराज Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 25 Apr 2026 03:16 AM IST
विज्ञापन
सार

संविधान का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में कठिन भाषा और मोटी किताब की छवि उभरती है, लेकिन अब भारत का संविधान रामचरित मानस की तरह गाया, समझा और आसानी से याद किया जा सकेगा।

Prayagraj: Now the Constitution can also be sung on the lines of Ramcharit Manas.
भारत का संविधान - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

भारत की विधि गरिमा गढ़कर, संविधान शुचि कृति लाए... गठित किए प्रारूप समिति को, निर्माता शाेभा पाए। संविधान का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में कठिन भाषा और मोटी किताब की छवि उभरती है, लेकिन अब भारत का संविधान रामचरित मानस की तरह गाया, समझा और आसानी से याद किया जा सकेगा। पहली बार देश के संपूर्ण संविधान को दोहा, रोला और विभिन्न छंदों में पिरोया गया है। भारत सहित नेपाल, इंडोनेशिया, सिंगापुर और कुवैत आदि देशों के 142 रचनाकारों ने मिलकर इस महाग्रंथ को काव्य के रूप में सृजित किया है, जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया है।



अब तक संविधान मूल रूप से गद्य विधा में ही उपलब्ध था, जिसका अब मानक हिंदी भाषा में छंदबद्ध भावानुवाद किया गया है। इस महाग्रंथ में संविधान के सभी अनुच्छेदों को 2110 दोहों और 422 रोलों में पिरोया गया है, जबकि संविधान के 22 भागों को 22 अलग-अलग छंदगीतों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। भारत माता गीत और संविधान संशोधन सहित कुल 26 छंदों का प्रयोग किया गया है। अब इसे गीत के रूप में रिकॉर्ड किए जाने की तैयारी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

आसानी से याद कर सकेंगे विद्यार्थी

इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि संविधान के मूल भाव को बिना बदले, उसे सरल, सहज और मधुर गीत के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। इसे आमजन, विद्यार्थी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थी आसानी से समझ और याद कर सकें। 26 नवंबर 1949 की ऐतिहासिक तिथि से प्रेरित होकर 26 छंदों में संविधान की पूरी आत्मा को समेटा गया है। इस कार्य की शुरुआत 26 नवंबर 2022 को हुई और 26 नवंबर 2023 को इसे पूरा करने में सफलता मिली।
विज्ञापन

512 पन्नों के इस ग्रंथ की रचना करने में 14 वर्ष के बाल सृजनकार से लेकर 81 वर्ष की वरिष्ठ रचनाकार तक सहभागी बनीं। हम भारत के लोग से प्रेरित होकर इस रचना में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध धर्म की 92 महिलाएं और 48 पुरुषों ने इसका सृजन कर अनेकता में एकता की अद्भुत मिसाल पेश की है। संवाद

उपलब्धि को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
इस अद्वितीय साहित्यिक उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिली है। इस कृति को फर्स्ट पोएट्री बुक ऑन कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ इंडिया शीर्षक से गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज किया है। इस विश्व रिकॉर्ड को संयुक्त रूप से संपादक डॉ. ओमकार साहू ‘मृदुल’, सह संपादक डॉ. मधु शंखधर ‘स्वतंत्र’ और सह संपादक डॉ. सपना दत्ता ‘सुहासिनी’ ने हासिल किया है। भारतीय संविधान पर आधारित पहली काव्यात्मक पुस्तक ‘छंदबद्ध भारत का संविधान’ को 29 अक्तूबर 2023 को प्रदर्शित किया गया था, जिसे भारत का पहला संविधान विषयक काव्य ग्रंथ माना गया।

संगीतमय संविधान के कुछ छंद
बाइस भाग व नौ अनुसूची, प्रारंभिक रूप समाया।
अनुच्छेद त्री शत पंचान्बे, भाव विधिक यह पहुंचाया।।

संशोधन से वृद्धि सदा कर, न्याय सकल जग दर्शाया।
सन पचास छब्बीस जनवरी, लागू हो करके आया।।

अर्थ : संविधान के प्रारंभिक रूप में 22 भाग और आठ अनुसूचियां शामिल थीं। इसमें 395 अनुच्छेद थे, जिनमें विधिक और भावनात्मक दोनों प्रकार के प्रावधान समाहित थे। समय-समय पर संशोधनों के माध्यम से इसमें आवश्यक वृद्धि और सुधार किए गए, जिससे न्याय और समानता की भावना पूरे समाज में बनी रहे। यह संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ और देश के शासन का आधार बना।

तिथि अगस्त उनतीस गठित विधि, सन सैंतालिस में आया।
भीमराव अध्यक्ष बने थे, नीति नियम की वह छाया।।

कठिन परिश्रम का फल शाश्वत, सन अड़तालिस तक आया।
देश सभ्यता संस्कृति शासन, दर्पण दर्शन का लाया।।

अर्थ : 29 अगस्त 1947 को संविधान निर्माण के लिए प्रारूप समिति का गठन किया गया। इस समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव आंबेडकर बने, जिन्होंने नीति और नियमों के आधार पर संविधान की रूपरेखा तैयार की। उनके कठिन परिश्रम और सतत प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि 1948 तक संविधान का प्रारूप तैयार होकर सामने आया। इस संविधान ने देश की सभ्यता, संस्कृति, शासन व्यवस्था और मूल आदर्शों को एक दर्पण की तरह स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया।

जिस प्रकार संस्कृत की जटिलताओं के कारण वाल्मीकि रामायण सीमित रही, लेकिन गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस सरलता और गेयता के कारण जन-जन तक पहुंची। उसी प्रकार छंदबद्ध संविधान का उद्देश्य संविधान को आम जनता तक सरल और सहज रूप से पहुंचाना है।
- डॉ. मधु शंखधर ‘स्वतंत्र’

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed