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नीले ड्रम में नोट मिलने का मामला : राकेश बोला- करोड़ों रुपये मेरे नहीं, नहीं मालूम कहां से आए

Fri, 30 Oct 2026 03:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 30 Oct 2026 03:16 PM IST
सार

नवाबगंज के बरईपुर गांव में जमीन के अंदर तीन ड्रम में मिले करोड़ों रुपये की नकदी के मामले में मकान मालिक राकेश यादव के बयान को लेकर पेच फंस गया है। पुलिस पूछताछ के दौरान राकेश ने कहा कि रुपये उसके नहीं हैं।

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Rakesh said, "The crores of rupees are not mine; I don't know where they came from
नवाबगंज पुलिस ने बरामद किया ड्रम में नोट। - फोटो : samvad

विस्तार

नवाबगंज के बरईपुर गांव में जमीन के अंदर तीन ड्रम में मिले करोड़ों रुपये की नकदी के मामले में मकान मालिक राकेश यादव के बयान को लेकर पेच फंस गया है। पुलिस पूछताछ के दौरान राकेश ने कहा कि रुपये उसके नहीं हैं। उसे यह भी नहीं मालूम कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, एक दिन पूर्व उसने रकम पुणे से लाए जाने की बात कही थी, लेकिन अब वह अलग बयान दे रहा है। 

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अब पूरे मामले की जांच का जिम्मा अब आयकर विभाग के पास है। विभाग की पांच सदस्यीय टीम नकदी की गिनती शुरू कर चुकी है। टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रकम कहां से आई, किसकी है और इसे जमीन के अंदर ड्रमों में छिपाकर क्यों रखा गया था। नकदी के स्रोत का पता लगाने के लिए परिवार के सदस्यों की आर्थिक गतिविधियों की भी पड़ताल की जा रही है।

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जांच के दायरे में राकेश यादव, बबलू, समीर और परिवार के अन्य सदस्यों के बैंक खाते शामिल हैं। उनके नाम पर मौजूद संपत्तियों का ब्योरा भी जुटाया जा रहा है। आयकर विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि परिवार की घोषित आय और संपत्तियों के बीच कोई असमानता तो नहीं है। आय से अधिक संपत्ति होने की आशंका के पहलू की भी जांच की जा रही है। डीसीपी सोनम कुमार ने बताया कि करोड़ों रुपये मिलने के बाद राकेश यादव ने कहा है कि यह रुपये उसके नहीं हैं, मामले की जांच अब आयकर विभाग की टीम कर रही है।

साइबर ठगी और वित्तीय धोखाधड़ी का भी शक

नकदी की बड़ी मात्रा को देखते हुए यह आशंका भी जताई जा रही है कि रकम साइबर ठगी, ऑनलाइन धोखाधड़ी या किसी अन्य वित्तीय अपराध से जुड़ी हो सकती है। आयकर विभाग नकदी के स्रोत और परिवार के वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहा है। पुणे से रकम लाए जाने की सूचना और परिवार के सदस्यों के पुराने संपर्कों की कड़ियों को भी खंगाला जा रहा है।

पुणे से लौटने के बाद खरीदी 22 बीघे जमीन

ग्रामीणों के मुताबिक, कोविड के दौरान पुणे से गांव लौटने के बाद राकेश यादव ने करीब 22 बीघे जमीन खरीदी। ग्रामीण इस जमीन की कीमत 10 करोड़ रुपये से अधिक बताते हैं। इसके बाद उसने करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से मकान बनवाया। दो ट्रैक्टर, डीजे और पिकअप वाहन भी खरीदे। बाद में वह गांव में सीमेंट और सरिया का कारोबार करने लगा।

थानों से खंगाला आपराधिक इतिहास

पुलिस ने राकेश यादव और उसके परिवार के सदस्यों की पृष्ठभूमि की जांच भी शुरू कर दी है। नवाबगंज, फाफामऊ, सोरांव और थरवई समेत आसपास के थानों में उनके आपराधिक रिकॉर्ड खंगाले गए हैं। शुरुआती जांच में पता चला कि राकेश यादव के खिलाफ नवाबगंज थाने में मारपीट की एक प्राथमिकी दर्ज है।

35 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात

नकदी मिलने के बाद पुलिस ने राकेश यादव के मकान को सील कर दिया है। मकान के साथ बगीचे और आसपास की खाली जमीन को भी पुलिस टेप लगाकर घेर दिया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर परिसर के चारों ओर 40 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। पुलिस ने करीब साढ़े चार घंटे तक मकान में तलाशी अभियान चलाया था।
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