समुद्र कूप : सैकड़ों साल से इस कुएं का पानी जस का तस, प्रभु राम के अनुज भरत से है इसका संबंध
प्रयागराज के पुरानी झूंसी के उल्टा किला स्थित ऐतिहासिक कुएं को समुद्र कूप के नाम से जाना जाता है। पौराणिक रूप से इसका संबंध प्रभु राम के अनुज भरत से बताया जाता है तो ऐतिहासिक रूप से यह समुद्रगुप्त की ओर से बनवाया माना जाता है।
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प्रयागराज के पुरानी झूंसी के उल्टा किला स्थित ऐतिहासिक कुएं को समुद्र कूप के नाम से जाना जाता है। पौराणिक रूप से इसका संबंध प्रभु राम के अनुज भरत से बताया जाता है तो ऐतिहासिक रूप से यह समुद्रगुप्त की ओर से बनवाया माना जाता है। मान्यता है कि इसका जल सीधे समुद्र से जुड़ा है। पिछले दिनों जब प्रयागराज के महापौर ने समुद्र कूप के पानी की शुद्धता जांचने के लिए प्रयोगशाला में भिजवाया तो यह कुआं और उल्टा किला दोनों चर्चा में आ गए।
आलेख
प्रयागराज। गंगापार स्थित पुरानी झूंसी का उल्टा किला इन दिनों खासा चर्चा में है। इसका कारण यहां स्थित चमत्कारी कुआं है जिसे ‘समुद्र कूप’ के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि सैकड़ों साल से इस कुएं का पानी जस का तस है। पिछले दिनों शहर के महापौर ने इस कुएं का पानी ग्रहण कर दावा किया कि इसका जल आज भी बिल्कुल शुद्ध है। उन्होंने इस कुएं के जल की गुणवत्ता परखने के लिए लैब में भी भिजवाया।
समुद्र कूप के जल की शुद्धता पर चर्चा शुरू हुई तो इसके पौराणिक और धार्मिक महत्व के बारे में लोगों में उत्सुकता जागी। साहित्य और संस्कृति के मर्मज्ञ रविनंदन सिंह के संकलन ‘प्रयाग गौरव’ में इस कुएं का माहात्म्य प्रभु राम के भाई भरत से संबंधित होना बताया गया है। वनवास के दौरान अपने बड़े भाई राम से मिलकर लौटते समय भरत ने प्रतिष्ठानपुर में जिस जगह समुद्र का जल गिरा दिया था, वहीं समुद्र कूप बन गया। माना जाता है कि समुद्र कूप का जल सीधे समुद्र से जुड़ा है।
वर्ष 1880-81 में अयोध्या से आए साधु सुदर्शनदास ने इस कूप को पूरा साफ कराया था। उन्होंने ही कुएं के पास मंदिर बनवाया। पुरातात्विक दृष्टि से कहा जाता है कि समुद्रगुप्त ने अपने शासनकाल में इस कुएं का निर्माण कराया था। जिस टीले पर यह कूप स्थित है, उसके पास गंगा की ओर जाने पर प्राचीन गुफाओं के अवशेष भी मिलते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि कभी समुद्र कूप के पास बस्ती भी आबाद रही होगी। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण के पूर्वज पुरवा की राजधानी इसी क्षेत्र में थी।
सृष्टि का पहला यज्ञ और समुद्र कूप
मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि का पहला यज्ञ प्रयाग में किया था। इसमें देवी-देवताओं, समुद्र, नदियों व अन्य जल स्रोतों को आमंत्रित किया था। यज्ञ समाप्त होने पर वापस जाते समुद्र और नदियों से ब्रह्मा जी ने अपना-अपना अंश प्रयाग में छोड़ने का आह्वान किया। उनके कहने पर समुद्र, नदियों व अन्य जलस्रोतों ने अपने-अपने अंश छोड़े भी। जिस जगह समग्र जल एकत्र हुआ, उस स्थान पर यह कुआं बना। इसीलिए मान्यता है कि समुद्र कूप में सभी पवित्र जल स्रोतों के अंश समाहित हैं। झूंसी के ऐतिहासिक उल्टा किला और उसके साथ समुद्र कूप के जीर्णोद्धार की जब तैयारी हो रही है, तब इस अद्भुत कुएं के पर्यटन मानचित्र पर आने की उम्मीद भी जग गई है।
