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High Court : आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में ''गंभीर संदेह'' ही आरोप तय करने का पर्याप्त आधार

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 07 Jan 2026 07:28 PM IST
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सार

गोरखपुर निवासी अशोक सिंह उर्फ काली सिंह पर अपने ही सगे भाई दीन दयाल सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में चौकी बेनीगंज थाने में मुकदमा दर्ज है। मृतक का शव 02 मार्च 2020 को मिला था और उसकी जेब से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ था।

Serious suspicion" is sufficient ground to frame charges in case of abetment to suicide
अदालत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों में आरोप तय करने के चरण में अदालत को सबूतों का बारीकी से मूल्यांकन करने की आवश्यकता नहीं है। यदि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से अपराध करने का गंभीर संदेह या पूर्वानुमान पैदा होता है तो ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोप तय किया जाना पूरी तरह वैध है। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोप तय किए जाने के खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने दिया है।

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गोरखपुर निवासी अशोक सिंह उर्फ काली सिंह पर अपने ही सगे भाई दीन दयाल सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में चौकी बेनीगंज थाने में मुकदमा दर्ज है। मृतक का शव 02 मार्च 2020 को मिला था और उसकी जेब से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ था। इसमें आवेदक अशोक सिंह की ओर से उत्पीड़न करने को मौत का जिम्मेदार ठहराया गया था। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोप पत्र का संज्ञान लेकर 24 जनवरी 2024 को आरोप तय किए और समन आदेश जारी कर दिया।

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याची ने समन आदेश व आरोप तय किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि सुसाइड नोट में मृतक के हस्ताक्षर पहले पैराग्राफ के बाद ही हैं, जबकि लेख नौ पैराग्राफ तक चलता है। ऐसे में इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। सुसाइड नोट में मृतक के पिता को भी जिम्मेदार ठहराया गया है, जबकि पिता की मृत्य उक्त घटना के चार महीने पहले ही हो गई थी। मृतक की पत्नी ने पुलिस को दिए पत्र में आत्महत्या के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया था और व्यापारिक घाटे को मौत का कारण बताया था। बाद में प्रताड़ना का आरोप लगाया।

वहीं राज्य के अधिवक्ता ने दलील दी कि सुसाइड नोट और जांच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्य आरोपी की संलिप्तता दर्शाने के लिए पर्याप्त हैं। केवल संदेह के आधार पर भी आरोप तय किए जा सकते हैं। इसके लिए बिस्तृत कारणों की जरूरत नहीं होती। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि सुसाइड नोट नकली है या असली, पत्नी के बयानों में विरोधाभास क्यों हैं। ये सभी विषय मुकदमे के ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर तय किए जाएंगे। इसी के साथ कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

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