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Prayagraj News: महाकुंभ भगदड़ में मृतकों के मुआवजा दावे पर 30 दिन के भीतर लें फैसला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाकुंभ के दौरान हुई भगदड़ में जान गंवाने वालों के परिजनों के मुआवजा दावे पर 30 दिन के भीतर फैसला लेने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत मुआवजे के दावों का निस्तारण करना न्यायिक जांच आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इसलिए प्रशासन जांच रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कहकर मुआवजा नहीं रोक सकता। न्यायालय ने मेलाधिकारी को आदेश दिया कि वे याचिकाकर्ता के दावे पर अगले तीन सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय लें और अनुपालन हलफनामा दाखिल करें। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने प्रयागराज निवासी संजय कुमार शर्मा की याचिका पर दिया है।
याची ने मौनी अमावस्या के दिन हुई भगदड़ में एक रिश्तेदार की मृत्यु पर मुआवजे की मांग करते हुए मेला प्रशासन के समक्ष आवेदन किया था। सुनवाई न होने पर याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि न्यायिक जांच आयोग के सचिव ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि मुआवजे के आवेदनों का निपटारा करना आयोग के कार्यक्षेत्र में नहीं आता। मेला प्रशासन को इसे अपने स्तर पर तय करना चाहिए। अदालत ने कहा कि जब राज्य सरकार स्वयं स्वीकार कर चुकी है कि भगदड़ में जनहानि हुई है और कुछ अन्य मृतकों के परिजनों को पहले ही मुआवजा दिया जा चुका है, तो याचिकाकर्ता के मामले में देरी का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
कोर्ट ने भविष्य के लिए भी यह सिद्धांत तय किया है कि मुआवजे के सभी दावों का सत्यापन जिला मजिस्ट्रेट या मेलाधिकारी को ही करना होगा। इसके लिए पुलिस की पंचनामा रिपोर्ट और मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से तैयार पोस्टमार्टम रिपोर्ट को पुख्ता साक्ष्य माना जाएगा। वर्तमान मामले में मृतक शिवा देवी का पोस्टमार्टम और पंचनामा रिकॉर्ड पर मौजूद है, जिसे प्रशासन ने चुनौती नहीं दी है। ऐसे में कोर्ट ने तीन सप्ताह में याची के दावे पर फैसला लेने का आदेश दिया है।
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याची ने मौनी अमावस्या के दिन हुई भगदड़ में एक रिश्तेदार की मृत्यु पर मुआवजे की मांग करते हुए मेला प्रशासन के समक्ष आवेदन किया था। सुनवाई न होने पर याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि न्यायिक जांच आयोग के सचिव ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि मुआवजे के आवेदनों का निपटारा करना आयोग के कार्यक्षेत्र में नहीं आता। मेला प्रशासन को इसे अपने स्तर पर तय करना चाहिए। अदालत ने कहा कि जब राज्य सरकार स्वयं स्वीकार कर चुकी है कि भगदड़ में जनहानि हुई है और कुछ अन्य मृतकों के परिजनों को पहले ही मुआवजा दिया जा चुका है, तो याचिकाकर्ता के मामले में देरी का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
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कोर्ट ने भविष्य के लिए भी यह सिद्धांत तय किया है कि मुआवजे के सभी दावों का सत्यापन जिला मजिस्ट्रेट या मेलाधिकारी को ही करना होगा। इसके लिए पुलिस की पंचनामा रिपोर्ट और मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से तैयार पोस्टमार्टम रिपोर्ट को पुख्ता साक्ष्य माना जाएगा। वर्तमान मामले में मृतक शिवा देवी का पोस्टमार्टम और पंचनामा रिकॉर्ड पर मौजूद है, जिसे प्रशासन ने चुनौती नहीं दी है। ऐसे में कोर्ट ने तीन सप्ताह में याची के दावे पर फैसला लेने का आदेश दिया है।
