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UP: 'जब तक गोमांस जब्त न हो, वाहन जब्त करना अवैध और मनमाना', यूपी सरकार पर दो लाख का जुर्माना; कोर्ट का फैसला

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: Sharukh Khan Updated Thu, 30 Apr 2026 11:37 AM IST
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सार

गोमांस की पुष्टि बिना वाहन जब्त करने पर राज्य सरकार पर दो लाख रुपये का हर्जाना लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम के मामले में अहम फैसला सुनाया है।

Allahabad High Court imposes fine of 2 lakh on UP government Vehicle Seized Without Confirmation
Allahabad High Court - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम के तहत वाहन सीज करने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि जब तक वैज्ञानिक रूप से यह साबित न हो जाए कि बरामद मांस वास्तव में गोमांस है, तब तक वाहन को जब्त करना अवैध और मनमाना है।
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यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने वाहन सीज करने के आदेश को रद्द कर दिया। याची को आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए सरकार पर दो लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने दिया है।
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बागपत जिले में 18 अक्तूबर 2024 को पुलिस ने याची के वाहन को इस संदेह में पकड़ा था कि उसमें प्रतिबंधित मांस ले जाया जा रहा है। डीएम ने 16 जून 2025 को वाहन को जब्त करने का आदेश दिया। याची मोहम्मद चांद ने जब्ती आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

 

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि पशु चिकित्सक की रिपोर्ट में मांस के गोमांस होने की कोई निश्चित पुष्टि नहीं की गई थी, बल्कि उसे केवल संदिग्ध बताया गया था।

कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम के तहत कार्यवाही शुरू करने के लिए अधिकृत प्रयोगशाला की रिपोर्ट अनिवार्य है। इस मामले में प्रयोगशाला की कोई पुख्ता रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी, इसलिए जब्ती की पूरी प्रक्रिया अवैध है।
 

कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता का वाहन उसकी आजीविका का एकमात्र स्रोत था। पिछले 18 महीनों से वाहन के अवैध रूप से बंद रहने के कारण उसे आर्थिक क्षति हुई है। कोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट और मंडलायुक्त के आदेशों को रद्द कर दिया। सात दिनों के भीतर याचिकाकर्ता को दो लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया। न्यायालय ने सरकार को यह छूट भी दी है कि वह हर्जाने की राशि संबंधित उत्तरदायी अधिकारियों से वसूल सकती है।
 
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