{"_id":"69ca405d62b129a09904063d","slug":"there-has-been-a-decline-in-writing-and-music-in-bollywood-a-special-conversation-with-the-actor-who-reached-2026-03-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Prayagraj : बॉलीवुड में लेखनी और संगीत में आई गिरावट, प्रयागराज पहुंचे अभिनेता से खास बातचीत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Prayagraj : बॉलीवुड में लेखनी और संगीत में आई गिरावट, प्रयागराज पहुंचे अभिनेता से खास बातचीत
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 30 Mar 2026 02:50 PM IST
विज्ञापन
सार
बॉलीवुड में समय के साथ काफी बदलाव आया है, लेकिन लेखनी, संगीत, गायन और संवाद के स्तर में गिरावट देखने को मिली है। गुफ्तगू के न्योते पर रविवार को प्रयागराज लिटरेरी फेस्टिवल में शिरकत करने आए अभिनेता रजा मुराद ने अमर उजाला के लिए संवाद न्यूज एजेंसी से आर्य कन्या पीजी कॉलेज में फिल्म से लेकर संगीत तक पर अपने विचार रखे।
रजा मुराद, फिल्म अभिनेता।
- फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन
विस्तार
बॉलीवुड में समय के साथ काफी बदलाव आया है, लेकिन लेखनी, संगीत, गायन और संवाद के स्तर में गिरावट देखने को मिली है। गुफ्तगू के न्योते पर रविवार को प्रयागराज लिटरेरी फेस्टिवल में शिरकत करने आए अभिनेता रजा मुराद ने अमर उजाला के लिए संवाद न्यूज एजेंसी से आर्य कन्या पीजी कॉलेज में फिल्म से लेकर संगीत तक पर अपने विचार रखे।
Trending Videos
उन्होंने बताया कि वह जल्द ही निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म लव एंड वॉर में नजर आएंगे, जो भंसाली के साथ उनकी पांचवीं फिल्म होगी। उनका कहना है कि आज के दौर में राज कपूर और लता मंगेशकर जैसे कलाकारों की कल्पना करना मुश्किल है। पहले फिल्मों में कुछ खास विषय होते थे और मेलोड्रामा का अपना अलग महत्व था, लेकिन अब निर्देशक नई तकनीक और सोच के साथ काम कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
रजा मुराद ने बताया कि आजकल फिल्मों का रुझान भी बदल गया है। अब एमएस धोनी, सचिन तेंदुलकर, मिल्खा सिंह और मैरी कॉम जैसी हस्तियों पर आधारित बायोपिक फिल्में बन रही हैं, जो दर्शकों को प्रेरित करती हैं। उन्होंने बॉलीवुड में लेखन और संवाद के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि अब कोई भी पुराने स्तर के संवाद लेखक की भरपाई नहीं कर पा रहा है।
उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि अब तो लोग टेबल पर बैठे-बैठे ही फिल्में बना लेते हैं। संगीत के बदलते स्वरूप पर उन्होंने कहा कि आज के संगीत में मधुरता की जगह शोर अधिक सुनाई देता है, जिससे पुराने दौर की आत्मीयता कहीं खोती जा रही है।
संगम और कंपनी गार्डन जरूर जाता हूं...
प्रयागराज से अपने जुड़ाव को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वह वर्ष 1972 से यहां आते रहे हैं। कहा कि जब भी प्रयागराज आता हूं तो कंपनी गार्डन और संगम जरूर जाता हूं। वहां जाकर चंद्रशेखर आजाद को नमन करता हूं। उन्होंने शहर में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले प्रयागराज इतना विस्तृत नहीं था, लेकिन अब यहां तेजी से विकास हुआ है और दूर-दूर तक टावर नजर आते हैं। यहां की पुरानी इमारतों और ऐतिहासिक स्थलों को ऐसे ही रहने देना चाहिए।