UP :दूसरे ग्रुप का ब्लड चढ़ाने से महिला की गई थी जान, कोर्ट ने कहा-याची और प्रतिवादी दोनों तय करें मुआवजा राशि
इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल से जुड़े एक गंभीर चिकित्सा लापरवाही के मामले में सुनवाई की गई। अस्पताल प्रशासन ने दूसरे ग्रुप का ब्लड चढ़ाने से महिला की मौत की बात स्वीकार कर ली।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल से जुड़े एक गंभीर चिकित्सा लापरवाही के मामले में सुनवाई की गई। अस्पताल प्रशासन ने दूसरे ग्रुप का ब्लड चढ़ाने से महिला की मौत की बात स्वीकार कर ली। इस पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि अपर महाधिवक्ता और याची अधिवक्ता आपसी सहमति से पीड़ित परिवार को दिए जाने वाले मुआवजे की राशि तय करें। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में समिति गठित करने का आदेश भी दिया गया।
यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने दिया। याची सौरभ सिंह सोमवंशी की मां का इलाज न्यूरोलॉजी विभाग में चल रहा था। उनका आरोप है कि दूसरे ग्रुप का ब्लड चढ़ाने से मां की हालत गंभीर हो गई और अंतत: उनकी जान चली गई। इसे लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनके अधिवक्ता राणा सिंह के कोर्ट में दस्तावेज पेश करने के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से अपर महाधिवक्ता ने यह स्वीकार किया कि दूसरे ग्रुप का ब्लड चढ़ाने से मरीज की मौत हुई।
इस पर कोर्ट ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य का यह सांविधानिक और प्रशासनिक दायित्व है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। यह घटना उनकी जिम्मेदारी की विफलता को दर्शाती है। कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया में चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक (डायरेक्टर जनरल ऑफ मेडिकल एजुकेशन) को छठे प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया।
अनुच्छेद-21 का उल्लेख कर कोर्ट ने कहा कि जीवन का अधिकार सर्वोपरि है। अस्पताल प्रशासन को ऐसे पुख्ता इंतजाम करने होंगे, जिससे सुविधाओं की कमी या लापरवाही के कारण किसी भी मरीज की जान न जाए। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को दोपहर दो बजे होगी।
