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Ambedkar Nagar News: बाढ़ प्रभावित इलाकों में बनेंगी 14 चौकियां, 13 राहत शिविर
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कलेक्ट्रेट सभागार में बाढ़ से बचाव की तैयारियों की समीक्षा बैठक करतीं डीएम ईशा प्रिया व मौजूद अ
- फोटो : गायत्री शक्ति पीठ मंदिर में आयोजित शिविर में योग का प्रशिक्षण करते बच्चे।
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अंबेडकरनगर। आगामी मानसून और संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। डीएम ईशा प्रिया ने मंगलवार को सभी विभागों की तैयारियों की समीक्षा की। टांडा और आलापुर तहसील क्षेत्रों के बाढ़ संभावित गांवों की सुरक्षा के लिए 14 बाढ़ चौकियां, 13 राहत शिविर तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही 40 नावें, 90 नाविक और 31 गोताखोर तैयार रखे गए हैं।
डीएम ने कहा कि ने बाढ़ नियंत्रण कक्ष को चौबीसों घंटे सक्रिय रखने, राहत शिविरों, नावों और गोताखोरों की उपलब्धता सुनिश्चित करें। सभी नाविकों का प्रशिक्षण 20 जून तक पूरा करा लिया जाएगा। बाढ़ संभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव व्यवस्था कागजों तक सीमित न रहे बल्कि हर स्तर पर उसकी जमीनी तैयारी भी दिखाई देनी चाहिए।
बता दें कि टांडा और आलापुर तहसील के 34 गांव बाढ़ प्रभावित श्रेणी में चिह्नित हैं। डीएम ने पशुपालन विभाग को बाढ़ संभावित क्षेत्रों में शत-प्रतिशत पशु टीकाकरण पूरा कराने तथा स्वास्थ्य विभाग को दवाओं, मेडिकल टीमों और संक्रामक रोगों की रोकथाम की तैयारी रखने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि बाढ़ के दौरान लोगों को खाद्यान्न, पेयजल, दवाइयों, पशुचारे और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी न होने पाए। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित राहत पहुंचाने के लिए तैयार रहें।
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नगरीय क्षेत्रों में भी व्यवस्था होगी दुरुस्त
नगर निकायों को नालों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी। इसके साथ ही विद्युत विभाग को जर्जर पोल और तारों की मरम्मत कराने तथा लोक निर्माण विभाग को वैकल्पिक मार्गों का चिह्नांकन और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का जिम्मा सौंपा गया है। साथ ही प्रमुख स्नान घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बांस की डबल लेयर बैरिकेडिंग लगाने का आदेश भी दिया गया है।
डीएम ने कहा कि ने बाढ़ नियंत्रण कक्ष को चौबीसों घंटे सक्रिय रखने, राहत शिविरों, नावों और गोताखोरों की उपलब्धता सुनिश्चित करें। सभी नाविकों का प्रशिक्षण 20 जून तक पूरा करा लिया जाएगा। बाढ़ संभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव व्यवस्था कागजों तक सीमित न रहे बल्कि हर स्तर पर उसकी जमीनी तैयारी भी दिखाई देनी चाहिए।
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बता दें कि टांडा और आलापुर तहसील के 34 गांव बाढ़ प्रभावित श्रेणी में चिह्नित हैं। डीएम ने पशुपालन विभाग को बाढ़ संभावित क्षेत्रों में शत-प्रतिशत पशु टीकाकरण पूरा कराने तथा स्वास्थ्य विभाग को दवाओं, मेडिकल टीमों और संक्रामक रोगों की रोकथाम की तैयारी रखने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि बाढ़ के दौरान लोगों को खाद्यान्न, पेयजल, दवाइयों, पशुचारे और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी न होने पाए। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित राहत पहुंचाने के लिए तैयार रहें।
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