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Ambedkar Nagar News: आठ वर्ष बाद पलटे गवाह, छेड़छाड़ का आरोपी बरी
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अंबेडकरनगर। वर्ष 2018 में छेड़छाड़, पॉक्सो और एससी-एसटी एक्ट के मामले में करीब आठ वर्ष बाद फैसला आया है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मोहन कुमार की अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को अविश्वसनीय और विरोधाभासी मानते हुए आरोपी हबीब अहमद को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। वहीं, शिकायतकर्ता के न्यायालय में दिए गए बयान और एफआईआर में दर्ज आरोपों के बीच बड़ा अंतर पाए जाने पर अदालत ने नोटिस देकर जवाब मांगा है।
मामला इब्राहिमपुर क्षेत्र के फरीदपुर कला गांव से जुड़ा है। पांच अक्तूबर 2018 को दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि स्कूल जा रही एक नाबालिग छात्रा के साथ रास्ते में हबीब अहमद ने छेड़छाड़ की थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी, पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर उसे न्यायालय भेज दिया था।
सुनवाई के दौरान मामले की दिशा उस समय बदल गई जब अभियोजन पक्ष के प्रमुख गवाह अदालत में अपने ही आरोपों से पीछे हटते नजर आए। मुकदमे के वादी ने अदालत में कहा कि उसकी बहन ने उसे किसी व्यक्ति का नाम नहीं बताया था। उसने यह भी दावा किया कि पुलिस ने उससे सादे कागज पर हस्ताक्षर कराए थे और बाद में उसमें क्या लिखा गया, इसकी जानकारी उसे नहीं थी।
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मामले के दूसरे महत्वपूर्ण गवाह और पीड़िता के चचेरे भाई ने भी अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया। पीड़िता के भी बयान जिरह के दौरान बदलते रहे। अदालत ने अपने निर्णय में उल्लेख किया कि पीड़िता के पुलिस, मजिस्ट्रेट और न्यायालय के समक्ष दिए गए बयानों में गंभीर विरोधाभास हैं। उसकी गवाही पूरी तरह भरोसेमंद नहीं मानी जा सकती। फैसले में न्यायालय ने आरोपी को दोषमुक्त करते हुए वादी को कारण बताओ नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है।
मामला इब्राहिमपुर क्षेत्र के फरीदपुर कला गांव से जुड़ा है। पांच अक्तूबर 2018 को दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि स्कूल जा रही एक नाबालिग छात्रा के साथ रास्ते में हबीब अहमद ने छेड़छाड़ की थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी, पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर उसे न्यायालय भेज दिया था।
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