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Ambedkar Nagar News: तीन दिन में 44 लोग हुए सर्पदंश का शिकार
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अंबेडकरनगर। जिले में दो दिन पहले हुई झमाझम बारिश के बाद सर्पदंश के मामलों में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बारिश के कारण बिलों में पानी भरने और जमीन के भीतर उमस बढ़ने से सांप सुरक्षित स्थानों की तलाश में बाहर निकल रहे हैं, जिससे खेतों, घरों और आबादी वाले क्षेत्रों में लोगों के संपर्क में आने की घटनाएं बढ़ गई हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार शुक्रवार रात से रविवार तक जिले में सर्पदंश के 42 मामले सामने आए। हालांकि सोमवार को राहत रही और जिला अस्पताल की इमरजेंसी में केवल दो मरीज भर्ती हुए जिनकी हालत अब सामान्य बताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार बरसात के मौसम में कोबरा, करैत और वाइपर जैसे विषैले सांपों का खतरा सबसे अधिक रहता है। कोबरा और करैत के डसने पर शरीर की नसों पर असर पड़ता है और पीड़ित न्यूरो पैरालिसिस का शिकार हो सकता है। इसलिए किसी भी सर्पदंश को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
सीएमएस डॉ. पीएन यादव ने बताया कि सर्पदंश होने पर सबसे पहले 108 एंबुलेंस को सूचना दें। पीड़ित को शांत रखें और अनावश्यक हिलने-डुलने न दें, क्योंकि इससे जहर तेजी से फैल सकता है। काटे गए स्थान के आसपास से कपड़े या आभूषण हटा दें, घाव को साबुन-पानी से साफ कर कपड़े से ढक दें और बिना देरी अस्पताल पहुंचाएं।
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उन्होंने कहा कि झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू उपचार के चक्कर में समय गंवाना जानलेवा साबित हो सकता है। सर्पदंश का एकमात्र प्रभावी उपचार समय पर अस्पताल पहुंचकर एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) लेना है।
सर्पदंश होने पर क्या करें
काटे गए स्थान के ऊपर कपड़ा या पट्टी कसकर बांधें।
जिस अंग पर सांप ने काटा है, उसे अनावश्यक न हिलाएं।
बिना देरी नजदीकी अस्पताल पहुंचकर एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन लगवाएं।
झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के भरोसे समय बर्बाद न करें।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार शुक्रवार रात से रविवार तक जिले में सर्पदंश के 42 मामले सामने आए। हालांकि सोमवार को राहत रही और जिला अस्पताल की इमरजेंसी में केवल दो मरीज भर्ती हुए जिनकी हालत अब सामान्य बताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार बरसात के मौसम में कोबरा, करैत और वाइपर जैसे विषैले सांपों का खतरा सबसे अधिक रहता है। कोबरा और करैत के डसने पर शरीर की नसों पर असर पड़ता है और पीड़ित न्यूरो पैरालिसिस का शिकार हो सकता है। इसलिए किसी भी सर्पदंश को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
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सीएमएस डॉ. पीएन यादव ने बताया कि सर्पदंश होने पर सबसे पहले 108 एंबुलेंस को सूचना दें। पीड़ित को शांत रखें और अनावश्यक हिलने-डुलने न दें, क्योंकि इससे जहर तेजी से फैल सकता है। काटे गए स्थान के आसपास से कपड़े या आभूषण हटा दें, घाव को साबुन-पानी से साफ कर कपड़े से ढक दें और बिना देरी अस्पताल पहुंचाएं।
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उन्होंने कहा कि झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू उपचार के चक्कर में समय गंवाना जानलेवा साबित हो सकता है। सर्पदंश का एकमात्र प्रभावी उपचार समय पर अस्पताल पहुंचकर एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) लेना है।
सर्पदंश होने पर क्या करें
काटे गए स्थान के ऊपर कपड़ा या पट्टी कसकर बांधें।
जिस अंग पर सांप ने काटा है, उसे अनावश्यक न हिलाएं।
बिना देरी नजदीकी अस्पताल पहुंचकर एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन लगवाएं।
झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के भरोसे समय बर्बाद न करें।