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Ambedkar Nagar News: टांडा बाईपास भूमि अधिग्रहण में कलेक्टर का अवार्ड निरस्त
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टांडा तहसील क्षेत्र के सुलेमपुर से गुजरा वाराणसी-लुंबिनी नेशनल हाईवे। संवाद
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अंबेडकरनगर। टांडा बाईपास के लिए वर्ष 2012 में अधिग्रहीत भूमि के मुआवजा विवाद में जिला न्यायालय ने किसानों को बड़ी राहत दी है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंद्रोदय कुमार ने मध्यस्थ (कलेक्टर) से पारित मध्यस्थीय अवार्ड को स्पष्ट कानूनी त्रुटि मानते हुए निरस्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अब पक्षकार राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकारी के समक्ष नए सिरे से मध्यस्थता करा सकेंगे।
टांडा तहसील के सुलेमपुर निवासी विनय कुमार वर्मा, रामशंकर, राधेश्याम, रामअजोर, हरिश्चंद्र, रामसागर, कपिल देव, अमरावती, शिवकुमारी, लाली देवी और सुषमा देवी ने मध्यस्थता आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी। विपक्षी पक्ष में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), परियोजना निदेशक एनएचएआई तथा सक्षम प्राधिकारी भूमि अधिग्रहण (एडीएम वित्त एवं राजस्व) को बनाया गया था।
क्या था पूरा मामला
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-233 (भारत-नेपाल सीमा लुंबिनी से वाराणसी मार्ग) पर टांडा बाईपास निर्माण के लिए वर्ष 2012 में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की थी। 15 जून 2012 को अधिसूचना जारी हुई और ग्राम सुलेमपुर की 2.4738 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की गई। इसके बाद 3 सितंबर 2015 को सक्षम प्राधिकारी (सीएएलए) ने मुआवजा तय करते हुए कुल 1.11 करोड़ रुपये का अवार्ड पारित किया। किसानों का कहना था कि उनकी भूमि टांडा बाजार के निकट होने, मुख्य सड़क से जुड़ी होने तथा व्यावसायिक व आवासीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण थी, जबकि उसका मूल्यांकन केवल कृषि भूमि मानकर कर दिया गया। किसानों ने 13 जनवरी 2012 की गाटा संख्या-88 की बिक्री विलेख (सेल डीड) को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर अधिक मुआवजे की मांग की थी।
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अदालत ने क्या कहा
जिला जज ने अपने फैसले में कहा कि मध्यस्थ ने किसानों की भूमि की व्यावसायिक और आवासीय संभावनाओं, सड़क संपर्क और टांडा बाजार से निकटता का स्वतंत्र मूल्यांकन नहीं किया। अदालत ने पाया कि कुल 10 बिक्री विलेखों पर विचार किया गया, लेकिन 13 जनवरी 2012 की महत्वपूर्ण बिक्री विलेख को शामिल ही नहीं किया गया। साथ ही चार बिक्री विलेख केवल आवासीय उपयोग का आधार बताकर अलग कर दिए गए। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला अदालत ने पूरे अवार्ड को निरस्त करते हुए नए सिरे से मध्यस्थता का रास्ता खोल दिया।
ऐसे होगा मूल्यांकन
अदालत ने आदेश दिया कि यदि नए सिरे से मध्यस्थता शुरू होती है तो मध्यस्थ गाटा संख्या-72, 73, 75, 84 और 139 की व्यावसायिक व आवासीय संभावनाओं, सड़क संपर्क, टांडा बाजार से दूरी तथा 13 जनवरी 2012 की बिक्री विलेख सहित अन्य तुलनात्मक बिक्री विलेखों का निष्पक्ष मूल्यांकन करेगा।
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टांडा तहसील के सुलेमपुर निवासी विनय कुमार वर्मा, रामशंकर, राधेश्याम, रामअजोर, हरिश्चंद्र, रामसागर, कपिल देव, अमरावती, शिवकुमारी, लाली देवी और सुषमा देवी ने मध्यस्थता आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी। विपक्षी पक्ष में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), परियोजना निदेशक एनएचएआई तथा सक्षम प्राधिकारी भूमि अधिग्रहण (एडीएम वित्त एवं राजस्व) को बनाया गया था।
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क्या था पूरा मामला
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-233 (भारत-नेपाल सीमा लुंबिनी से वाराणसी मार्ग) पर टांडा बाईपास निर्माण के लिए वर्ष 2012 में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की थी। 15 जून 2012 को अधिसूचना जारी हुई और ग्राम सुलेमपुर की 2.4738 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की गई। इसके बाद 3 सितंबर 2015 को सक्षम प्राधिकारी (सीएएलए) ने मुआवजा तय करते हुए कुल 1.11 करोड़ रुपये का अवार्ड पारित किया। किसानों का कहना था कि उनकी भूमि टांडा बाजार के निकट होने, मुख्य सड़क से जुड़ी होने तथा व्यावसायिक व आवासीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण थी, जबकि उसका मूल्यांकन केवल कृषि भूमि मानकर कर दिया गया। किसानों ने 13 जनवरी 2012 की गाटा संख्या-88 की बिक्री विलेख (सेल डीड) को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर अधिक मुआवजे की मांग की थी।
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अदालत ने क्या कहा
जिला जज ने अपने फैसले में कहा कि मध्यस्थ ने किसानों की भूमि की व्यावसायिक और आवासीय संभावनाओं, सड़क संपर्क और टांडा बाजार से निकटता का स्वतंत्र मूल्यांकन नहीं किया। अदालत ने पाया कि कुल 10 बिक्री विलेखों पर विचार किया गया, लेकिन 13 जनवरी 2012 की महत्वपूर्ण बिक्री विलेख को शामिल ही नहीं किया गया। साथ ही चार बिक्री विलेख केवल आवासीय उपयोग का आधार बताकर अलग कर दिए गए। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला अदालत ने पूरे अवार्ड को निरस्त करते हुए नए सिरे से मध्यस्थता का रास्ता खोल दिया।
ऐसे होगा मूल्यांकन
अदालत ने आदेश दिया कि यदि नए सिरे से मध्यस्थता शुरू होती है तो मध्यस्थ गाटा संख्या-72, 73, 75, 84 और 139 की व्यावसायिक व आवासीय संभावनाओं, सड़क संपर्क, टांडा बाजार से दूरी तथा 13 जनवरी 2012 की बिक्री विलेख सहित अन्य तुलनात्मक बिक्री विलेखों का निष्पक्ष मूल्यांकन करेगा।