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Ambedkar Nagar News: कार से टकराकर गिरा बाइक सवार, ट्रक ने कुचला, मौत
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शुभम दूबे।फाइल फोटो
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जहांगीरगंज। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। कार की टक्कर के बाद सड़क पर गिरे बाइक सवार शुभम दुबे (25) को पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, बाइक पर सवार उनका चचेरा भाई रानू गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसका अयोध्या के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। हादसे की खबर मिलते ही पूरे गांव में मातम पसर गया।
जहांगीरगंज क्षेत्र के माधवपुर गांव निवासी शुभम दुबे (25) अपने चचेरे भाई रानू दुबे के साथ बुधवार को किसी काम से बाइक से गोरखपुर गए थे। रात करीब 10:30 बजे दोनों घर लौट रहे थे। गोरखपुर के बेलघाट क्षेत्र में गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के किमी संख्या-39 पर पीछे से आ रही एक अज्ञात कार ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों युवक बाइक समेत सड़क पर जा गिरे। इसी दौरान पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने शुभम को कुचल दिया। हेलमेट लगाए होने के बावजूद शुभम की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, रानू उछलकर डिवाइडर से टकराया और गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना पर बेलघाट पुलिस मौके पर पहुंची। रानू को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलघाट पहुंचाया गया। जानकारी मिलते ही परिवार के लोग बेलघाट पहुंचे और रानू को अयोध्या के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां उपचार चल रहा है।
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बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही शुभम का शव गांव पहुंचा, परिजनों में चीख-पुकार मच गई। बेलघाट पुलिस ने अज्ञात कार चालक के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। एक्सप्रेसवे पर लगे सीसीटीवी कैमरों से वाहन की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
पिता के दो माह बाद इकलौते बेटे की उठी अर्थी, उजड़ गई मां और तीन बहनों की दुनिया
जहांगीरगंज। नियति कभी-कभी ऐसा दर्द दे जाती है, जिसकी भरपाई पूरी उम्र नहीं हो पाती। माधवपुर गांव में भी कुछ ऐसा ही हुआ। माधवपुर निवासी सरिता दूबे पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। शुभम की मौत से करीब दो माह पहले उनके पिता अजीत दूबे का बीमारी के चलते निधन हो गया था। अजीत दूबे पीएसी से एक वर्ष पहले सेवानिवृत्त हुए थे। पति के जाने का दुख कम भी नहीं हुआ था कि इकलौते बेटे की अर्थी उठ गई। शुभम ही परिवार में अपनी तीन बहनों दीप्ति, मोहिनी और छाया का इकलौता भाई था। दो बहनों की शादी हो चुकी थी लेकिन भाई के प्रति उनका स्नेह आज भी वैसा ही था। बहनों ने रक्षाबंधन को लेकर काफी तैयारियां भी की थीं। मां के साथ बहने भी शुभम की मौत के बाद बदहवास हैं। उनके करुण विलाप ने वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम कर दीं। गांव के लोग बताते हैं कि पिता की मौत के बाद शुभम ही परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद था।
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जहांगीरगंज क्षेत्र के माधवपुर गांव निवासी शुभम दुबे (25) अपने चचेरे भाई रानू दुबे के साथ बुधवार को किसी काम से बाइक से गोरखपुर गए थे। रात करीब 10:30 बजे दोनों घर लौट रहे थे। गोरखपुर के बेलघाट क्षेत्र में गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के किमी संख्या-39 पर पीछे से आ रही एक अज्ञात कार ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी।
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टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों युवक बाइक समेत सड़क पर जा गिरे। इसी दौरान पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने शुभम को कुचल दिया। हेलमेट लगाए होने के बावजूद शुभम की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, रानू उछलकर डिवाइडर से टकराया और गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना पर बेलघाट पुलिस मौके पर पहुंची। रानू को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलघाट पहुंचाया गया। जानकारी मिलते ही परिवार के लोग बेलघाट पहुंचे और रानू को अयोध्या के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां उपचार चल रहा है।
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बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही शुभम का शव गांव पहुंचा, परिजनों में चीख-पुकार मच गई। बेलघाट पुलिस ने अज्ञात कार चालक के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। एक्सप्रेसवे पर लगे सीसीटीवी कैमरों से वाहन की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
पिता के दो माह बाद इकलौते बेटे की उठी अर्थी, उजड़ गई मां और तीन बहनों की दुनिया
जहांगीरगंज। नियति कभी-कभी ऐसा दर्द दे जाती है, जिसकी भरपाई पूरी उम्र नहीं हो पाती। माधवपुर गांव में भी कुछ ऐसा ही हुआ। माधवपुर निवासी सरिता दूबे पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। शुभम की मौत से करीब दो माह पहले उनके पिता अजीत दूबे का बीमारी के चलते निधन हो गया था। अजीत दूबे पीएसी से एक वर्ष पहले सेवानिवृत्त हुए थे। पति के जाने का दुख कम भी नहीं हुआ था कि इकलौते बेटे की अर्थी उठ गई। शुभम ही परिवार में अपनी तीन बहनों दीप्ति, मोहिनी और छाया का इकलौता भाई था। दो बहनों की शादी हो चुकी थी लेकिन भाई के प्रति उनका स्नेह आज भी वैसा ही था। बहनों ने रक्षाबंधन को लेकर काफी तैयारियां भी की थीं। मां के साथ बहने भी शुभम की मौत के बाद बदहवास हैं। उनके करुण विलाप ने वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम कर दीं। गांव के लोग बताते हैं कि पिता की मौत के बाद शुभम ही परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद था।