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Ambedkar Nagar News: अवैध बालू खनन के मामले में सीजेएम कोर्ट का आदेश निरस्त
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अंबेडकरनगर। अवैध बालू खनन के हंसवर के वर्ष 2020 के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट न्यायालय ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय से पारित संज्ञान आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने माना कि खनन एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के अनिवार्य प्रावधानों का पालन किए बिना आरोप पत्र पर संज्ञान लिया गया था।
मामला हंसवर क्षेत्र में दर्ज मामले से जुड़ा है। प्रकरण में खनन निरीक्षक ने 8 नवंबर 2020 को अवैध बालू खनन की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बाद में पुलिस ने विवेचना करते हुए जनपद गोंडा के नवाबगंज के चौबेपुर के रामबहादुर, चक रसूलपुर के राजकरन, जनपद सुल्तानपुर के कानूपुर धमौर के श्रवण कुमार, पूरे जगत खनिया पूरा निवासी इंद्रदेव यादव, बस्ती के मलोली दूबे छावनी निवासी कोते और बिहार प्रांत के सीवान के कुमना सास निवासी प्रकाश कुमार गिरी के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया गया था।
आरोप पत्र पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 10 मार्च 2021 को संज्ञान लेते हुए आरोपियों को तलब किया था।आरोपियों ने दांडिक पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर कहा कि ऐसे मामलों में न्यायालय केवल केंद्र या राज्य सरकार के अधिकृत अधिकारी की लिखित शिकायत पर ही संज्ञान ले सकता है। पुलिस की ओर से दाखिल आरोप पत्र के आधार पर संज्ञान लिया जाना कानून के अनुरूप नहीं है।
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विशेष न्यायाधीश पवन कुमार शुक्ला ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि निचली अदालत ने विवेचक की ओर से प्रस्तुत आरोप पत्र पर संज्ञान लिया था जबकि अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकारी की लिखित शिकायत आवश्यक थी। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि संज्ञान आदेश टाइपशुदा प्रोफार्मा पर अत्यंत संक्षिप्त रूप में पारित किया गया था और उसमें संज्ञान लेने के कारणों का उल्लेख नहीं था।
न्यायालय ने माना कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश विधि सम्मत नहीं था। फलस्वरूप पुनरीक्षण स्वीकार करते हुए 10 मार्च 2021 का संज्ञान आदेश निरस्त कर दिया। साथ ही निचली अदालत को निर्देश दिया गया कि वह न्यायालय के निष्कर्षों के आलोक में विधि के अनुसार फिर से उचित आदेश पारित करें।
मामला हंसवर क्षेत्र में दर्ज मामले से जुड़ा है। प्रकरण में खनन निरीक्षक ने 8 नवंबर 2020 को अवैध बालू खनन की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बाद में पुलिस ने विवेचना करते हुए जनपद गोंडा के नवाबगंज के चौबेपुर के रामबहादुर, चक रसूलपुर के राजकरन, जनपद सुल्तानपुर के कानूपुर धमौर के श्रवण कुमार, पूरे जगत खनिया पूरा निवासी इंद्रदेव यादव, बस्ती के मलोली दूबे छावनी निवासी कोते और बिहार प्रांत के सीवान के कुमना सास निवासी प्रकाश कुमार गिरी के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया गया था।
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आरोप पत्र पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 10 मार्च 2021 को संज्ञान लेते हुए आरोपियों को तलब किया था।आरोपियों ने दांडिक पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर कहा कि ऐसे मामलों में न्यायालय केवल केंद्र या राज्य सरकार के अधिकृत अधिकारी की लिखित शिकायत पर ही संज्ञान ले सकता है। पुलिस की ओर से दाखिल आरोप पत्र के आधार पर संज्ञान लिया जाना कानून के अनुरूप नहीं है।
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न्यायालय ने माना कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश विधि सम्मत नहीं था। फलस्वरूप पुनरीक्षण स्वीकार करते हुए 10 मार्च 2021 का संज्ञान आदेश निरस्त कर दिया। साथ ही निचली अदालत को निर्देश दिया गया कि वह न्यायालय के निष्कर्षों के आलोक में विधि के अनुसार फिर से उचित आदेश पारित करें।