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Ambedkar Nagar News: अब सुरक्षित होंगे तटवर्ती गांव, कटान रोकने का काम शुरू
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राजेसुल्तानपुर (अंबेडकरनगर)। सरयू नदी के किनारे वर्षों से कटान की मार झेल रहे मांझा कम्हरिया, बद्री का पूरा और पटपरवा गांव के निवासियों के लिए राहत भरी खबर है। बाढ़ कार्य खंड अयोध्या द्वारा 3.74 करोड़ रुपये की लागत से कटान रोकने की महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू किया जा रहा है। इस योजना के तहत लगभग 1150 मीटर की लंबाई में पर्क्युपाइन स्टड लगाए जाएंगे, जिससे नदी की धारा को नियंत्रित कर कटान पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
मांझा कम्हरिया क्षेत्र के किसानों ने पिछले चार वर्षों में सरयू की लहरों से भारी तबाही झेली है। नदी अब तक 500 बीघा से अधिक उपजाऊ भूमि, ट्यूबवेल, रिहाइशी मड़ई और शीशम के बागों को निगल चुकी है। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि पिछले साल नदी बद्री का पूरा और पटपरवा गांव से मात्र 150 मीटर की दूरी पर रह गई थी, जिसके बाद प्रशासन ने ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने की तैयारी भी शुरू कर दी थी।
ज्ञात हो कि कांग्रेस जिलाध्यक्ष कृष्ण कुमार यादव और समाजसेवी मित्रसेन के नेतृत्व में किए गए धरने और जल सत्याग्रह के बाद बाढ़ कार्य खंड ने शुरुआती कदम उठाए थे। अब इस नई परियोजना से गांवों को स्थायी सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। योजना के अनुसार, नदी के किनारे और भीतर कुल पांच पंक्तियों में पर्क्युपाइन लगाए जाएंगे, जिससे नदी की धारा का रुख मोड़कर किनारों को सुरक्षित किया जाएगा।
अब सुरक्षित होंगे तटवर्ती घर और जमीन
इससे पहले भी कटान रोकने के लिए स्टड, बंबू क्रेट, ट्री स्पर और जियो ट्यूब जैसे कई तकनीकी उपाय किए गए थे, लेकिन वे प्रभावी सिद्ध नहीं हो सके। पिछले वर्ष जब नदी का जलस्तर बढ़ा, तो हालात इतने नाजुक हो गए थे कि गांव कटान के मुहाने से महज 150 मीटर की दूरी पर रह गए थे। अब इस नई परियोजना को क्षेत्र के लिए गेमचेंजर (निर्णायक) माना जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों को विश्वास है कि इस बार न केवल उनके घर और जमीन सुरक्षित रहेंगे, बल्कि भविष्य में होने वाले नुकसान से भी बचाव हो सकेगा।
अधिकारियों ने किया निरीक्षण
सोमवार को सहायक अभियंता अंशुल वर्मा, अवर अभियंता फागूलाल और सुमन सिंह ने कार्यस्थल का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिए। सहायक अभियंता ने जानकारी दी कि टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही निर्माण सामग्री मंगाकर काम शुरू कर दिया जाएगा। इस परियोजना को 6 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
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मांझा कम्हरिया क्षेत्र के किसानों ने पिछले चार वर्षों में सरयू की लहरों से भारी तबाही झेली है। नदी अब तक 500 बीघा से अधिक उपजाऊ भूमि, ट्यूबवेल, रिहाइशी मड़ई और शीशम के बागों को निगल चुकी है। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि पिछले साल नदी बद्री का पूरा और पटपरवा गांव से मात्र 150 मीटर की दूरी पर रह गई थी, जिसके बाद प्रशासन ने ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने की तैयारी भी शुरू कर दी थी।
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ज्ञात हो कि कांग्रेस जिलाध्यक्ष कृष्ण कुमार यादव और समाजसेवी मित्रसेन के नेतृत्व में किए गए धरने और जल सत्याग्रह के बाद बाढ़ कार्य खंड ने शुरुआती कदम उठाए थे। अब इस नई परियोजना से गांवों को स्थायी सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। योजना के अनुसार, नदी के किनारे और भीतर कुल पांच पंक्तियों में पर्क्युपाइन लगाए जाएंगे, जिससे नदी की धारा का रुख मोड़कर किनारों को सुरक्षित किया जाएगा।
अब सुरक्षित होंगे तटवर्ती घर और जमीन
इससे पहले भी कटान रोकने के लिए स्टड, बंबू क्रेट, ट्री स्पर और जियो ट्यूब जैसे कई तकनीकी उपाय किए गए थे, लेकिन वे प्रभावी सिद्ध नहीं हो सके। पिछले वर्ष जब नदी का जलस्तर बढ़ा, तो हालात इतने नाजुक हो गए थे कि गांव कटान के मुहाने से महज 150 मीटर की दूरी पर रह गए थे। अब इस नई परियोजना को क्षेत्र के लिए गेमचेंजर (निर्णायक) माना जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों को विश्वास है कि इस बार न केवल उनके घर और जमीन सुरक्षित रहेंगे, बल्कि भविष्य में होने वाले नुकसान से भी बचाव हो सकेगा।
अधिकारियों ने किया निरीक्षण
सोमवार को सहायक अभियंता अंशुल वर्मा, अवर अभियंता फागूलाल और सुमन सिंह ने कार्यस्थल का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिए। सहायक अभियंता ने जानकारी दी कि टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही निर्माण सामग्री मंगाकर काम शुरू कर दिया जाएगा। इस परियोजना को 6 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।

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