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Ambedkar Nagar News: दहेज प्रताड़ना व हत्या में पति, सास, ननद को 10-10 वर्ष की सजा
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अंबेडकरनगर। अपर सत्र न्यायाधीश रामविलास सिंह ने दहेज प्रताड़ना व हत्या के मामले में पति, सास और ननद को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही चार-चार हजार रुपये अर्थदंड लगाया है।
अकबरपुर के बरवा नासिरपुर निवासी दिलीप कुमार के मुताबिक उन्होंने अपनी बहन ममता (25) का विवाह चार मई 2016 को बनगांव डिहवा निवासी सूरज उर्फ विपेंद्र के साथ किया था। शादी के बाद से पति सूरज, ससुर बाबूराम व सास सुमित्रा और ननद प्रतिमा दहेज की मांग को लेकर उसका उत्पीड़न करते थे। 26 अप्रैल 2021 की सुबह 11 बजे उनकी बहन ने फोन पर अपने साथ मारपीट की घटना की जानकारी दी थी। जब वह बहन को देखने जिला अस्पताल पहुंचे तो सूचना मिली कि आरोपियों ने बहन को जला दिया है।
अस्पताल पहुंचने पर बहन भर्ती मिली लेकिन इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के दौरान ससुर बाबूराम भी झुलस गए थे और उन्हें भी भर्ती कराया गया था। पुलिस ने तहरीर के आधार पर आरोपियों के खिलाफ दहेज हत्या सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत कर दी थी। विचारण के दौरान कोर्ट ने पाया कि बाबूराम पर लगाए गए आरोप के संबंध में स्वयं मृतका के मृत्युकाली बयान में विरोधाभास है। बाबूराम ने अपने बयान में कहा कि वह बहू को बचाने के प्रयास में झुलस गए थे। ऐसे में बाबूराम पर लगाए गए आरोप साबित नहीं हो पाए। मामले में कोर्ट ने तीनों दोषियों को दहेज प्रताड़ना व दहेज हत्या का दोषी पाया और तीनों को 10-10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।
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अकबरपुर के बरवा नासिरपुर निवासी दिलीप कुमार के मुताबिक उन्होंने अपनी बहन ममता (25) का विवाह चार मई 2016 को बनगांव डिहवा निवासी सूरज उर्फ विपेंद्र के साथ किया था। शादी के बाद से पति सूरज, ससुर बाबूराम व सास सुमित्रा और ननद प्रतिमा दहेज की मांग को लेकर उसका उत्पीड़न करते थे। 26 अप्रैल 2021 की सुबह 11 बजे उनकी बहन ने फोन पर अपने साथ मारपीट की घटना की जानकारी दी थी। जब वह बहन को देखने जिला अस्पताल पहुंचे तो सूचना मिली कि आरोपियों ने बहन को जला दिया है।
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अस्पताल पहुंचने पर बहन भर्ती मिली लेकिन इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के दौरान ससुर बाबूराम भी झुलस गए थे और उन्हें भी भर्ती कराया गया था। पुलिस ने तहरीर के आधार पर आरोपियों के खिलाफ दहेज हत्या सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत कर दी थी। विचारण के दौरान कोर्ट ने पाया कि बाबूराम पर लगाए गए आरोप के संबंध में स्वयं मृतका के मृत्युकाली बयान में विरोधाभास है। बाबूराम ने अपने बयान में कहा कि वह बहू को बचाने के प्रयास में झुलस गए थे। ऐसे में बाबूराम पर लगाए गए आरोप साबित नहीं हो पाए। मामले में कोर्ट ने तीनों दोषियों को दहेज प्रताड़ना व दहेज हत्या का दोषी पाया और तीनों को 10-10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।

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