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Ambedkar Nagar News: कठिन परिस्थितियों में जरूरी होता है साहस और विश्वास
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sun, 15 Mar 2026 12:06 AM IST
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आलापुर। शहाबुद्दीनपुर में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन, प्रवचनकर्ता आशुतोष शुक्ला ने कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए जीवन के महत्वपूर्ण संदेश दिए। उन्होंने बताया कि अहंकार व्यक्ति को पतन की ओर ले जाता है, जबकि विनम्रता ही सच्ची शक्ति है। दुष्टता और छल का अंत निश्चित है, वहीं धर्म और सत्य की रक्षा होती है। कठिन परिस्थितियों में साहस और विश्वास बनाए रखना आवश्यक है।
कृष्ण की बाल लीलाओं को केवल धार्मिक प्रसंग न मानते हुए, उन्होंने इसमें जीवन और अध्यात्म से जुड़े गहरे संदेशों को उजागर किया। ब्रज की लीलाओं में प्रेम, करुणा, भक्ति और धर्म के विभिन्न आयामों को दर्शाया गया। मैया यशोदा और बाल कृष्ण के स्नेह का वर्णन करते हुए माखन चोरी की लीला का प्रसंग सुनाया गया, जिसे बाल्यकाल की सहजता और स्नेह का प्रतीक बताया गया। कंस द्वारा भेजी गई राक्षसी पूतना के अंत की कथा के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि दुष्ट प्रवृत्तियों का अंत निश्चित है और धर्म की रक्षा होती है। इस अवसर पर डॉ. राजेश त्रिपाठी, राधेश्याम, डॉ. श्रीराम दुलार, रमेश त्रिपाठी, राकेश, डॉ. के पी त्रिपाठी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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सच्ची आस्था ही मनुष्य को लक्ष्य तक पहुंचा सकती है
जमुनीपुर। अकबरपुर के रतनपुर स्थित एक निजी मैरिज लॉन में आयोजित श्रीराम कथा के चौथे दिन, प्रवचनकर्ता लक्ष्मणाचार्य ने राम विवाह प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सीता द्वारा गौरी पूजन के दौरान की गई प्रार्थना यह दर्शाती है कि सच्ची आस्था व्यक्ति को उसके लक्ष्य तक अवश्य पहुंचाती है। धनुष भंग प्रसंग इस बात का संकेत देता है कि सफलता उन्हीं को मिलती है जो योग्य, संयमी और अपने कार्य के प्रति समर्पित होते हैं। इस कथा में कैलाश नाथ श्रीवास्तव, रमाकांत तिवारी, वासुदेव मिश्र, चंद्रभान पाठक आदि उपस्थित रहे।
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फोटो - 6
ईमानदारी और नैतिक मूल्यों का पालन है आवश्यक
अंबेडकरनगर। अकबरपुर के समसपुर दोयम में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन, प्रवचनकर्ता बालमुकुंद शास्त्री ने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से मानव जीवन में धर्म और भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ईश्वर के प्रति आस्था और भक्ति मनुष्य को मानसिक संतुलन और शांति प्रदान करती है। भागवत के प्रसंग सिखाते हैं कि जीवन में सत्य, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक सोच बनाए रखने पर जोर दिया गया। धर्म और भक्ति के माध्यम से समाज में भाईचारा और सहयोग की भावना को मजबूत करने की बात कही गई। मानव जीवन में सेवा, करुणा और सहयोग की भावना को अपनाने से समाज में संतुलन और शांति बनी रहती है। भक्ति के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन की कठिनाइयों का सामना करने में सक्षम होता है।
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कृष्ण की बाल लीलाओं को केवल धार्मिक प्रसंग न मानते हुए, उन्होंने इसमें जीवन और अध्यात्म से जुड़े गहरे संदेशों को उजागर किया। ब्रज की लीलाओं में प्रेम, करुणा, भक्ति और धर्म के विभिन्न आयामों को दर्शाया गया। मैया यशोदा और बाल कृष्ण के स्नेह का वर्णन करते हुए माखन चोरी की लीला का प्रसंग सुनाया गया, जिसे बाल्यकाल की सहजता और स्नेह का प्रतीक बताया गया। कंस द्वारा भेजी गई राक्षसी पूतना के अंत की कथा के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि दुष्ट प्रवृत्तियों का अंत निश्चित है और धर्म की रक्षा होती है। इस अवसर पर डॉ. राजेश त्रिपाठी, राधेश्याम, डॉ. श्रीराम दुलार, रमेश त्रिपाठी, राकेश, डॉ. के पी त्रिपाठी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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सच्ची आस्था ही मनुष्य को लक्ष्य तक पहुंचा सकती है
जमुनीपुर। अकबरपुर के रतनपुर स्थित एक निजी मैरिज लॉन में आयोजित श्रीराम कथा के चौथे दिन, प्रवचनकर्ता लक्ष्मणाचार्य ने राम विवाह प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सीता द्वारा गौरी पूजन के दौरान की गई प्रार्थना यह दर्शाती है कि सच्ची आस्था व्यक्ति को उसके लक्ष्य तक अवश्य पहुंचाती है। धनुष भंग प्रसंग इस बात का संकेत देता है कि सफलता उन्हीं को मिलती है जो योग्य, संयमी और अपने कार्य के प्रति समर्पित होते हैं। इस कथा में कैलाश नाथ श्रीवास्तव, रमाकांत तिवारी, वासुदेव मिश्र, चंद्रभान पाठक आदि उपस्थित रहे।
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ईमानदारी और नैतिक मूल्यों का पालन है आवश्यक
अंबेडकरनगर। अकबरपुर के समसपुर दोयम में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन, प्रवचनकर्ता बालमुकुंद शास्त्री ने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से मानव जीवन में धर्म और भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ईश्वर के प्रति आस्था और भक्ति मनुष्य को मानसिक संतुलन और शांति प्रदान करती है। भागवत के प्रसंग सिखाते हैं कि जीवन में सत्य, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक सोच बनाए रखने पर जोर दिया गया। धर्म और भक्ति के माध्यम से समाज में भाईचारा और सहयोग की भावना को मजबूत करने की बात कही गई। मानव जीवन में सेवा, करुणा और सहयोग की भावना को अपनाने से समाज में संतुलन और शांति बनी रहती है। भक्ति के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन की कठिनाइयों का सामना करने में सक्षम होता है।