{"_id":"6a43f931cf39b599f404f440","slug":"how-can-a-person-have-two-fathers-the-court-raised-the-question-ambedkar-nagar-news-c-91-brp1007-159578-2026-06-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambedkar Nagar News: एक व्यक्ति के दो पिता कैसे, अदालत ने उठाया सवाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambedkar Nagar News: एक व्यक्ति के दो पिता कैसे, अदालत ने उठाया सवाल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंबेडकरनगर। राजेसुल्तानपुर के केदरूपुर गांव के एक ही व्यक्ति का दो अलग-अलग गांवों के परिवार रजिस्टर में दो अलग-अलग पिता के नाम से दर्ज होने और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के मामले में अदालत ने अहम टिप्पणी करते हुए निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम ने कहा कि मामले को केवल भूमि विवाद मानकर खारिज करना उचित नहीं था।
मामला राजेसुल्तानपुर के केदरूपुर निवासी सूरज उर्फ रूदल की ओर से दायर परिवाद से जुड़ा है। परिवादी का आरोप था कि ग्राम मसेना मिर्जापुर निवासी कल्पनाथ उर्फ कल्पू पुत्र सतई ने उसकी संपत्ति पर कब्जा करने की नीयत से फर्जी दस्तावेज तैयार कराए। आरोप है कि उसने ग्राम केदरूपुर के परिवार रजिस्टर में स्वयं को कल्पू पुत्र अतवारू के रूप में दर्ज करा लिया, जबकि अपने मूल गांव मसेना मिर्जापुर के परिवार रजिस्टर में उसका नाम कल्पनाथ पुत्र सतई दर्ज है। इसी कथित फर्जीवाड़े के आधार पर उसने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेकर सरकारी धन भी प्राप्त कर लिया तथा परिवादी की आबादी की भूमि पर आवास का निर्माण करा लिया।
परिवादी ने आरोप लगाया कि जब उसने इस पर विरोध जताया तो आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। इस संबंध में उसने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया, जिसे परिवाद के रूप में दर्ज कर साक्ष्य भी कराए गए। हालांकि अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 4 जून 2024 को इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामला मूल रूप से सिविल प्रकृति यानी भूमि विवाद का है।
विज्ञापन
इस आदेश के विरुद्ध दाखिल पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम राम विलास सिंह ने कहा कि निचली अदालत ने उपलब्ध अभिलेखों का समुचित परीक्षण नहीं किया। न्यायालय ने पाया कि एक परिवार रजिस्टर में व्यक्ति का नाम कल्पनाथ पुत्र सतई तथा दूसरे परिवार रजिस्टर में कल्पू पुत्र अतवारू दर्ज है। अदालत ने सवाल उठाया कि एक ही व्यक्ति के दो पिता कैसे हो सकते हैं और क्या अभिलेखों में कूटरचना कर नाम दर्ज कराया गया है, इसकी जांच आवश्यक थी।
निचली अदालत ने की महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी : कोर्ट
अदालत ने कहा कि निचली अदालत ने इन महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी कर मामले को सरसरी तौर पर भूमि विवाद मान लिया, जबकि प्रथम दृष्टया जालसाजी और सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी जैसे गंभीर आरोपों की जांच अपेक्षित थी। इन्हीं आधारों पर पुनरीक्षण स्वीकार करते हुए 4 जून 2024 का आदेश निरस्त कर दिया गया तथा निचली अदालत को निर्देश दिया गया कि मामले की पुनः सुनवाई कर विधि के अनुरूप नया आदेश पारित किया जाए। मामले में अगली सुनवाई के लिए 7 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की गई है।
विज्ञापन
मामला राजेसुल्तानपुर के केदरूपुर निवासी सूरज उर्फ रूदल की ओर से दायर परिवाद से जुड़ा है। परिवादी का आरोप था कि ग्राम मसेना मिर्जापुर निवासी कल्पनाथ उर्फ कल्पू पुत्र सतई ने उसकी संपत्ति पर कब्जा करने की नीयत से फर्जी दस्तावेज तैयार कराए। आरोप है कि उसने ग्राम केदरूपुर के परिवार रजिस्टर में स्वयं को कल्पू पुत्र अतवारू के रूप में दर्ज करा लिया, जबकि अपने मूल गांव मसेना मिर्जापुर के परिवार रजिस्टर में उसका नाम कल्पनाथ पुत्र सतई दर्ज है। इसी कथित फर्जीवाड़े के आधार पर उसने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेकर सरकारी धन भी प्राप्त कर लिया तथा परिवादी की आबादी की भूमि पर आवास का निर्माण करा लिया।
विज्ञापन
परिवादी ने आरोप लगाया कि जब उसने इस पर विरोध जताया तो आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। इस संबंध में उसने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया, जिसे परिवाद के रूप में दर्ज कर साक्ष्य भी कराए गए। हालांकि अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 4 जून 2024 को इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामला मूल रूप से सिविल प्रकृति यानी भूमि विवाद का है।
विज्ञापन
इस आदेश के विरुद्ध दाखिल पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम राम विलास सिंह ने कहा कि निचली अदालत ने उपलब्ध अभिलेखों का समुचित परीक्षण नहीं किया। न्यायालय ने पाया कि एक परिवार रजिस्टर में व्यक्ति का नाम कल्पनाथ पुत्र सतई तथा दूसरे परिवार रजिस्टर में कल्पू पुत्र अतवारू दर्ज है। अदालत ने सवाल उठाया कि एक ही व्यक्ति के दो पिता कैसे हो सकते हैं और क्या अभिलेखों में कूटरचना कर नाम दर्ज कराया गया है, इसकी जांच आवश्यक थी।
निचली अदालत ने की महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी : कोर्ट
अदालत ने कहा कि निचली अदालत ने इन महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी कर मामले को सरसरी तौर पर भूमि विवाद मान लिया, जबकि प्रथम दृष्टया जालसाजी और सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी जैसे गंभीर आरोपों की जांच अपेक्षित थी। इन्हीं आधारों पर पुनरीक्षण स्वीकार करते हुए 4 जून 2024 का आदेश निरस्त कर दिया गया तथा निचली अदालत को निर्देश दिया गया कि मामले की पुनः सुनवाई कर विधि के अनुरूप नया आदेश पारित किया जाए। मामले में अगली सुनवाई के लिए 7 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की गई है।