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Ambedkar Nagar News: खिलाड़ियों के सपनों की जमीं पर बदहाली का कब्जा
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राजकीय बालिका इंटर कॉलेज इनामीपुर टांडा के खेल मैदान पर झाड़ियों का कब्जा। संवाद
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अंबेडकरनगर। जिले के माध्यमिक विद्यालयों के खेल मैदानों की स्थिति चिंताजनक है। इन मैदानों पर अब खिलाड़ियों की दौड़ और अभ्यास की जगह सन्नाटा पसरा है। झाड़ियों और निर्माण सामग्री के कारण खेल क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। यह उपेक्षा विद्यार्थियों की खेल प्रतिभा के विकास में बाधा बन रही है।
पड़ताल में सामने आया कि कई विद्यालयों में मैदान उपलब्ध होने के बावजूद उनका प्रभावी उपयोग नहीं हो पा रहा। लंबे समय से रखरखाव न होने से मैदान खराब स्थिति में हैं। कुछ स्थानों पर उपलब्ध जगह पर अन्य कार्यों का दबाव भी है। जिले में कुल 364 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें 32 राजकीय, 60 सहायता प्राप्त और 272 निजी विद्यालय शामिल हैं। करीब 33 प्रकार की खेल गतिविधियां संचालित करने के निर्देश हैं। निजी विद्यालयों के पास अपने मैदान हैं, पर राजकीय और ज्यादातर वित्त विहीन विद्यालयों के मैदान सिर्फ कागजों पर हैं।
खेल मैदान विद्यार्थियों की प्रतिभा विकास का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। इन्हीं स्थानों पर धावक अपनी गति बढ़ाते हैं और खिलाड़ी अपनी तकनीक सुधारते हैं। मैदानों की खराब स्थिति का सीधा असर छात्र-छात्राओं की खेल गतिविधियों पर पड़ रहा है। इससे उनके भविष्य की संभावनाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। देखरेख के अभाव में मैदान जीवंत रहने की बजाय उपेक्षा की कहानी बयां कर रहे हैं।
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राजकीय बालिका इंटर कॉलेज इनामीपुर टांडा का हाल : राजकीय बालिका इंटर कॉलेज इनामीपुर टांडा का खेल मैदान बदहाल स्थिति में है। जिस स्थान पर छात्राओं की दौड़ और कबड्डी होनी थी, वहां झाड़ियों का फैलाव है। मैदान के कई हिस्सों में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। जमीन भी जगह-जगह असमतल हो चुकी है। ऐसे हालात में छात्राओं के लिए नियमित खेल गतिविधियों का संचालन मुश्किल हो गया है।
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पड़ताल में सामने आया कि कई विद्यालयों में मैदान उपलब्ध होने के बावजूद उनका प्रभावी उपयोग नहीं हो पा रहा। लंबे समय से रखरखाव न होने से मैदान खराब स्थिति में हैं। कुछ स्थानों पर उपलब्ध जगह पर अन्य कार्यों का दबाव भी है। जिले में कुल 364 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें 32 राजकीय, 60 सहायता प्राप्त और 272 निजी विद्यालय शामिल हैं। करीब 33 प्रकार की खेल गतिविधियां संचालित करने के निर्देश हैं। निजी विद्यालयों के पास अपने मैदान हैं, पर राजकीय और ज्यादातर वित्त विहीन विद्यालयों के मैदान सिर्फ कागजों पर हैं।
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खेल मैदान विद्यार्थियों की प्रतिभा विकास का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। इन्हीं स्थानों पर धावक अपनी गति बढ़ाते हैं और खिलाड़ी अपनी तकनीक सुधारते हैं। मैदानों की खराब स्थिति का सीधा असर छात्र-छात्राओं की खेल गतिविधियों पर पड़ रहा है। इससे उनके भविष्य की संभावनाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। देखरेख के अभाव में मैदान जीवंत रहने की बजाय उपेक्षा की कहानी बयां कर रहे हैं।
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राजकीय बालिका इंटर कॉलेज इनामीपुर टांडा का हाल : राजकीय बालिका इंटर कॉलेज इनामीपुर टांडा का खेल मैदान बदहाल स्थिति में है। जिस स्थान पर छात्राओं की दौड़ और कबड्डी होनी थी, वहां झाड़ियों का फैलाव है। मैदान के कई हिस्सों में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। जमीन भी जगह-जगह असमतल हो चुकी है। ऐसे हालात में छात्राओं के लिए नियमित खेल गतिविधियों का संचालन मुश्किल हो गया है।