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Ambedkar Nagar News: टंकी की पुताई कर रहा पेंटर 25 फीट नीचे गिरा, मौत
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.इब्राहिमपुर के बलरामपुर गांव में इसी पानी की टंकी से गिरकर हुई है पेंटर बाबूराम की मौत। संवाद
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सद्दरपुर/केदारनगर। इब्राहिमपुर के बलरामपुर गांव में रविवार शाम निर्माणाधीन पानी की टंकी की पुताई करते समय करीब 25 फिट ऊंची बांस की बाड़ खुल जाने से पेंटर बाबूराम जमीन पर गिर गए। गंभीर रूप से घायल पेंटर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र टांडा ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। हादसे के दौरान सेफ्टी बेल्ट का इस्तेमाल न होने की बात भी सामने आई है। हालांकि दो अन्य मजदूर बाल-बाल बच गए। अधिकारी कार्रवाई के बजाय एजेंसी और परिजनों के बीच समझौता होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
इब्राहिमपुर के बलरामपुर गांव में जल जीवन मिशन के तहत पानी की टंकी का निर्माण कराया गया है। इन दिनों इसकी पुताई का काम कराया जा रहा है। रविवार की सुबह 07:30 बजे जलालपुर गांव निवासी बाबूराम (51) घर से निकले थे। अन्य मजदूरों के साथ बांस-बल्ली और लोहे की जालियों के बाड़ के सहारे करीब 25 फिट ऊंचाई पर टंकी की पुताई कर रहे थे। शाम करीब 04:30 बजे बाड़ की बल्लियां व लोहे की जाली अचानक ढीली होकर खिसक गई। बाबूराम का संतुलन बिगड़ने से नीचे आ गिरे। इससे उनके सिर व अन्य अंगों पर गंभीर चोट ई। साथ में काम कर रहे दो अन्य मजदूर बच गए।
साथियों ने उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र टांडा पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उनको मृत घोषित कर दिया। हादसे की जानकारी मिलने के बाद जल निगम के अफसर, कार्यदायी संस्था के लोग मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिवार के लोगों से वार्ता कर उन्हें उचित मुआवजा मुहैया कराने का आश्वासन देकर शांत करा दिया। सोमवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम के दौरान एसडीएम टांडा डॉ. शशिशेखर, एसओ इब्राहिमपुर आशुतोष शर्मा मौजूद रहे। यहां पोस्टमार्टम के बाद शव गांव ले जाया गया जहां अंतिम संस्कार पुलिस की मौजूदगी में हुआ।
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परिवार के भरण पोषण का था जिम्मा
बाबूराम की मौत की खबर सुनते ही पत्नी चनरा देवी बेसुध हो गईं। चार संतानों में बड़ा बेटा अजय कुमार समूह में काम करता है। दो बेटे पवन व गुलशन व बेटी शिवानी पढ़ाई करते हैं। परिवार के भरण पोषण का जिम्मा बाबूराम पर ही था। इसमें कुछ सहयोग अजय कुमार का रहता था। फिलहाल परिवार के लोगों की ओर से पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं की गई है।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
हादसे के बाद निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मजदूरों को बिना सुरक्षा बेल्ट, हेलमेट और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के ऊंचाई पर काम कराया जा रहा था। श्रम सुरक्षा नियमों के अनुसार ऊंचाई पर कार्य करने वाले श्रमिकों को सुरक्षा किट उपलब्ध कराना अनिवार्य है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता तो शायद यह जान बच जाती।
इब्राहिमपुर के बलरामपुर गांव में जल जीवन मिशन के तहत पानी की टंकी का निर्माण कराया गया है। इन दिनों इसकी पुताई का काम कराया जा रहा है। रविवार की सुबह 07:30 बजे जलालपुर गांव निवासी बाबूराम (51) घर से निकले थे। अन्य मजदूरों के साथ बांस-बल्ली और लोहे की जालियों के बाड़ के सहारे करीब 25 फिट ऊंचाई पर टंकी की पुताई कर रहे थे। शाम करीब 04:30 बजे बाड़ की बल्लियां व लोहे की जाली अचानक ढीली होकर खिसक गई। बाबूराम का संतुलन बिगड़ने से नीचे आ गिरे। इससे उनके सिर व अन्य अंगों पर गंभीर चोट ई। साथ में काम कर रहे दो अन्य मजदूर बच गए।
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साथियों ने उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र टांडा पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उनको मृत घोषित कर दिया। हादसे की जानकारी मिलने के बाद जल निगम के अफसर, कार्यदायी संस्था के लोग मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिवार के लोगों से वार्ता कर उन्हें उचित मुआवजा मुहैया कराने का आश्वासन देकर शांत करा दिया। सोमवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम के दौरान एसडीएम टांडा डॉ. शशिशेखर, एसओ इब्राहिमपुर आशुतोष शर्मा मौजूद रहे। यहां पोस्टमार्टम के बाद शव गांव ले जाया गया जहां अंतिम संस्कार पुलिस की मौजूदगी में हुआ।
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बाबूराम की मौत की खबर सुनते ही पत्नी चनरा देवी बेसुध हो गईं। चार संतानों में बड़ा बेटा अजय कुमार समूह में काम करता है। दो बेटे पवन व गुलशन व बेटी शिवानी पढ़ाई करते हैं। परिवार के भरण पोषण का जिम्मा बाबूराम पर ही था। इसमें कुछ सहयोग अजय कुमार का रहता था। फिलहाल परिवार के लोगों की ओर से पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं की गई है।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
हादसे के बाद निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मजदूरों को बिना सुरक्षा बेल्ट, हेलमेट और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के ऊंचाई पर काम कराया जा रहा था। श्रम सुरक्षा नियमों के अनुसार ऊंचाई पर कार्य करने वाले श्रमिकों को सुरक्षा किट उपलब्ध कराना अनिवार्य है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता तो शायद यह जान बच जाती।