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Ambedkar Nagar News: खोवा में मिलावट के मामले में 16 वर्ष बाद सजा
Sun, 12 Jul 2026 01:34 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sun, 12 Jul 2026 01:34 AM IST
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अंबेडकरनगर। खाद्य पदार्थ में मिलावट के करीब 16 साल पुराने मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप कुमार ने आरोपी उमाशंकर को दोषी ठहराते हुए न्यायालय उठने तक की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर तीन हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना जमा न करने पर 15 दिन का साधारण कारावास भुगतना होगा।
मामला वर्ष 2008 से न्यायालय में लंबित अकबरपुर क्षेत्र से जुड़े फौजदारी वाद का है। सुनवाई के दौरान आरोपी ने जुर्म स्वीकारोक्ति प्रार्थनापत्र दाखिल कर कहा कि वह मुकदमे को आगे नहीं लड़ना चाहता और अपराध स्वीकार कर मामले का निस्तारण चाहता है। कोर्ट ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपी ने न्यायालय में उपस्थित होकर स्वेच्छा से अपराध स्वीकार किया है। मामले में जन विश्लेषक उत्तर प्रदेश लखनऊ की रिपोर्ट को भी आधार बनाया गया।
रिपोर्ट के अनुसार जांच किए गए खोवा के नमूने में मिल्क फैट की मात्रा निर्धारित मानक से कम थी। खोवा में मिल्क फैट की न्यूनतम सीमा 30 प्रतिशत तय थी, जबकि नमूना इस मानक पर खरा नहीं उतरा और उसे अपमिश्रित घोषित किया गया। कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों और उच्चतम न्यायालय के नेमीचंद बनाम स्टेट ऑफ राजस्थान के निर्णय का उल्लेख करते हुए स्वेच्छा से अपराध स्वीकार करने को ध्यान में रखा। इसके बाद कोर्ट ने उमाशंकर को दोषी करार देते हुए दंड सुनाया।
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मामला वर्ष 2008 से न्यायालय में लंबित अकबरपुर क्षेत्र से जुड़े फौजदारी वाद का है। सुनवाई के दौरान आरोपी ने जुर्म स्वीकारोक्ति प्रार्थनापत्र दाखिल कर कहा कि वह मुकदमे को आगे नहीं लड़ना चाहता और अपराध स्वीकार कर मामले का निस्तारण चाहता है। कोर्ट ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपी ने न्यायालय में उपस्थित होकर स्वेच्छा से अपराध स्वीकार किया है। मामले में जन विश्लेषक उत्तर प्रदेश लखनऊ की रिपोर्ट को भी आधार बनाया गया।
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रिपोर्ट के अनुसार जांच किए गए खोवा के नमूने में मिल्क फैट की मात्रा निर्धारित मानक से कम थी। खोवा में मिल्क फैट की न्यूनतम सीमा 30 प्रतिशत तय थी, जबकि नमूना इस मानक पर खरा नहीं उतरा और उसे अपमिश्रित घोषित किया गया। कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों और उच्चतम न्यायालय के नेमीचंद बनाम स्टेट ऑफ राजस्थान के निर्णय का उल्लेख करते हुए स्वेच्छा से अपराध स्वीकार करने को ध्यान में रखा। इसके बाद कोर्ट ने उमाशंकर को दोषी करार देते हुए दंड सुनाया।
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