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Ambedkar Nagar News: अप्रैल से अब तक 380 को सांप ने काटा, 12 की मौत
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अंबेडकरनगर। बारिश के दिनों में जिले में सांप के काटने की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। अप्रैल माह से 25 जून तक 380 लोगों को सांप ने डसा है, जिनमें से 12 लोगों की मौत हो गई। पिछले वित्तीय वर्ष से अब तक 14 मृतकों के परिवारों को जिला प्रशासन की ओर से चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। हाल ही में हुई मौतों पर संबंधित तहसीलों से रिपोर्ट मांगी जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जून और जुलाई में जिले में सांप के काटने के सबसे अधिक मामले आए थे। इनमें ज्यादातर घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों के खेतों, जलभराव वाले स्थानों और झाड़ियों के आसपास हुई थीं। सांप के काटने से मौत होने पर कई परिवार सामाजिक मान्यताओं और शव के पोस्टमार्टम को लेकर बनी भ्रांतियों के कारण यह प्रक्रिया नहीं कराते। नतीजतन मृत्यु का चिकित्सकीय प्रमाण उपलब्ध नहीं हो पाता और सरकारी आर्थिक सहायता का लाभ नहीं मिल पाता।
महामारी विशेषज्ञ डॉ. सुल्तान ने लोगों से अपील की कि किसी भी असामान्य मृत्यु की स्थिति में पोस्टमार्टम अवश्य कराया जाए। इससे मृत्यु का सही कारण स्पष्ट होता है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर सरकारी सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया भी आसान हो जाती है।
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नहीं लंबित है कोई आवेदन
जिले में अप्रैल से अब तक 380 लोगों को सांप ने डसा था। इनमें सभी को उपचार के लिए जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज लाया गया था। ऐसे में अब तक वित्तीय वर्ष अप्रैल में हुई 12 मौत सहित पिछले वित्तीय वर्ष में हुई मौत में बचे दो परिवारों सहित अब तक 14 लोगों को आर्थिक सहायता प्रशासन की ओर से मुहैया कराई जा चुकी है।
जुलाई में हुई सबसे अधिक मौतें
सांप डसने के सबसे अधिक मामले बारिश के बाद बढ़ने शुरू हुए। इसमें 11 जुलाई की रात जिला अस्पताल में सांप के डसने के 21 मरीज आए थे। हालांकि इस दौरान कोई जनहानि नहीं हुई थी। जून में चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि अप्रैल और मई में एक-एक मौत हुई थी। वहीं, जुलाई में अब तक चार मौतें हो चुकी हैं।
10 दिनों में मिली सहायता
आलापुर क्षेत्र के सरावां पट्टी गांव के रहने वाले सरवन को 19 अप्रैल को सांप ने काट लिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। पिता आत्मा प्रसाद ने बताया कि उन्हें चार लाख रुपये की सहायता 10 दिनों के अंदर ही मिल गई थी। इसके लिए उन्हें भागदौड़ नहीं करनी पड़ी। इसी तरह सम्मनपुर क्षेत्र के अमरतल गांव के रहने वाले सूरज की 30 मई की रात माैत हो गई थी। भाई रवि कुमार ने बताया कि उन्हें चार लाख रुपये की सहायता मिल गई है। एसडीएम वित्त एवं राजस्व ज्योत्सना बंधु ने बताया कि सर्पदंश से हुई मौत के मामले में 24 घंटे के अंदर आर्थिक सहायता की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। अब तक 14 लोगों को 56 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जून और जुलाई में जिले में सांप के काटने के सबसे अधिक मामले आए थे। इनमें ज्यादातर घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों के खेतों, जलभराव वाले स्थानों और झाड़ियों के आसपास हुई थीं। सांप के काटने से मौत होने पर कई परिवार सामाजिक मान्यताओं और शव के पोस्टमार्टम को लेकर बनी भ्रांतियों के कारण यह प्रक्रिया नहीं कराते। नतीजतन मृत्यु का चिकित्सकीय प्रमाण उपलब्ध नहीं हो पाता और सरकारी आर्थिक सहायता का लाभ नहीं मिल पाता।
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महामारी विशेषज्ञ डॉ. सुल्तान ने लोगों से अपील की कि किसी भी असामान्य मृत्यु की स्थिति में पोस्टमार्टम अवश्य कराया जाए। इससे मृत्यु का सही कारण स्पष्ट होता है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर सरकारी सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया भी आसान हो जाती है।
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नहीं लंबित है कोई आवेदन
जिले में अप्रैल से अब तक 380 लोगों को सांप ने डसा था। इनमें सभी को उपचार के लिए जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज लाया गया था। ऐसे में अब तक वित्तीय वर्ष अप्रैल में हुई 12 मौत सहित पिछले वित्तीय वर्ष में हुई मौत में बचे दो परिवारों सहित अब तक 14 लोगों को आर्थिक सहायता प्रशासन की ओर से मुहैया कराई जा चुकी है।
जुलाई में हुई सबसे अधिक मौतें
सांप डसने के सबसे अधिक मामले बारिश के बाद बढ़ने शुरू हुए। इसमें 11 जुलाई की रात जिला अस्पताल में सांप के डसने के 21 मरीज आए थे। हालांकि इस दौरान कोई जनहानि नहीं हुई थी। जून में चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि अप्रैल और मई में एक-एक मौत हुई थी। वहीं, जुलाई में अब तक चार मौतें हो चुकी हैं।
10 दिनों में मिली सहायता
आलापुर क्षेत्र के सरावां पट्टी गांव के रहने वाले सरवन को 19 अप्रैल को सांप ने काट लिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। पिता आत्मा प्रसाद ने बताया कि उन्हें चार लाख रुपये की सहायता 10 दिनों के अंदर ही मिल गई थी। इसके लिए उन्हें भागदौड़ नहीं करनी पड़ी। इसी तरह सम्मनपुर क्षेत्र के अमरतल गांव के रहने वाले सूरज की 30 मई की रात माैत हो गई थी। भाई रवि कुमार ने बताया कि उन्हें चार लाख रुपये की सहायता मिल गई है। एसडीएम वित्त एवं राजस्व ज्योत्सना बंधु ने बताया कि सर्पदंश से हुई मौत के मामले में 24 घंटे के अंदर आर्थिक सहायता की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। अब तक 14 लोगों को 56 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है।