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Ambedkar Nagar News: दुष्कर्म व धर्म परिवर्तन मामले में आरोपी को जमानत नहीं
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अंबेडकरनगर। किशोरी के अपहरण, दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन के आरोपी राज उर्फ अरमान की जमानत अर्जी विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मोहन कुमार ने खारिज कर दी है। न्यायालय ने मामले की परिस्थितियों और पीड़िता के बयानों को देखते हुए जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं माना।
यह मामला बेवाना थाने में दर्ज हुआ था। आजमगढ़ के एक व्यक्ति ने पांच मई 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया कि वर्ष 2025 में आरोपी राज उर्फ अरमान उसकी नाबालिग बेटियों को बहला-फुसलाकर ले गया था। आरोपी ने शादी का झांसा देकर किछौछा में धर्म परिवर्तन कराकर निकाह किया। यहीं रहते हुए उसने दुष्कर्म भी किया। इस दौरान एक पुत्री ने बच्चे को जन्म दिया था। पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में आने पर प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने आरोपी राज को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
अदालत के समक्ष दिए गए बयान में पीड़िता ने आरोपी का समर्थन किया। लेकिन न्यायालय ने घटना के समय पीड़िता के नाबालिग होने का उल्लेख किया। कानून के अनुसार नाबालिग की सहमति का ऐसे अपराध में विधिक महत्व नहीं है। न्यायालय ने यह भी माना कि मामले की विवेचना अभी चल रही है। आरोपी को जमानत पर छोड़े जाने पर साक्षियों को प्रभावित किए जाने की आशंका है।न्यायालय ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना आरोपी की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
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यह मामला बेवाना थाने में दर्ज हुआ था। आजमगढ़ के एक व्यक्ति ने पांच मई 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया कि वर्ष 2025 में आरोपी राज उर्फ अरमान उसकी नाबालिग बेटियों को बहला-फुसलाकर ले गया था। आरोपी ने शादी का झांसा देकर किछौछा में धर्म परिवर्तन कराकर निकाह किया। यहीं रहते हुए उसने दुष्कर्म भी किया। इस दौरान एक पुत्री ने बच्चे को जन्म दिया था। पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में आने पर प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने आरोपी राज को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
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अदालत के समक्ष दिए गए बयान में पीड़िता ने आरोपी का समर्थन किया। लेकिन न्यायालय ने घटना के समय पीड़िता के नाबालिग होने का उल्लेख किया। कानून के अनुसार नाबालिग की सहमति का ऐसे अपराध में विधिक महत्व नहीं है। न्यायालय ने यह भी माना कि मामले की विवेचना अभी चल रही है। आरोपी को जमानत पर छोड़े जाने पर साक्षियों को प्रभावित किए जाने की आशंका है।न्यायालय ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना आरोपी की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
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