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Amethi News: जिला अस्पताल में जल्द मिलेगी 117 जांच की सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 07 Mar 2026 11:58 PM IST
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. जिला अस्पताल में निर्माणाधीन आधुनिक लैब। -संवाद
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अमेठी सिटी। गौरीगंज स्थित संयुक्त जिला अस्पताल में एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशाला (आईपीएचएल) का बंद पड़ा निर्माण कार्य फिर शुरू हो गया है। यह काम तीन माह में पूरा होने की उम्मीद है। लैब के क्रियाशील हो जाने से कई गंभीर बीमारियों से जुड़ी 117 प्रकार की जांच जिला अस्पताल में होने लगेंगी। इसका सीधा फायदा जांच के लिए निजी लैब अथवा दूसरे शहरों तक दौड़ लगाने की परेशानी उठा रहे मरीजों को मिलेगा। वर्तमान में जिला अस्पताल की लैब में सिर्फ 26 तरह की जांच सुविधा ही मुहैया है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना के अंतर्गत करीब 80 लाख रुपये से जिला अस्पताल परिसर में 400 वर्गफीट क्षेत्रफल में आधुनिक पैथोलॉजी प्रयोगशाला का निर्माण हो रहा है। लैब के क्रियाशील होने पर मरीजों को पूरे सप्ताह तीन शिफ्ट में 24 घंटे जांच सुविधा उपलब्ध रहेगी। अभी जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में केवल सामान्य जांच ही हो पाती है। सेंट्रलाइज्ड पैथोलॉजी शुरू होने पर हेमेटोलॉजी के तहत सीबीसी, प्लेटलेट्स काउंट व हीमोग्लोबिन, बायोकैमिस्ट्री में एलएफटी, केएफटी व लिपिड प्रोफाइल और सेरोलॉजी में एचआईवी, हेपेटाइटिस व यौन जनित रोगों की जांच हो सकेगी।
इसके साथ ही मॉलिक्यूलर बायोलॉजी में पीसीआर के माध्यम से संक्रमण की पुष्टि, माइक्रो बैक्टीरियोलॉजी में कल्चर व टीबी की जांच, क्लीनिकल पैथोलॉजी में यूरिन, स्टूल व सीमेन की जांच और एफएनएसी से शरीर में गांठ की जांच कर कैंसर संक्रमण की पुष्टि भी हो सकेगी। बीते करीब सात माह से लैब का निर्माण कार्य बीच में अटका था। जिससे सैंपल कलेक्शन व पंजीकरण काउंटर के अस्थायी स्थानों से संचालित होने से मरीजों और कर्मचारियों को भी काफी परेशानी उठाना पड़ रही है। शासन के निर्देश पर कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ ने लैब का निर्माण दोबारा शुरू किया है।
इन बीमारियों की होगी जांच
आधुनिक प्रयोगशाला में कैंसर, गुर्दा रोग, हृदय रोग, चिकनगुनिया, डेंगू, जापानी इंसेफेलाइटिस, एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम, कालाजार व स्क्रब टाइफस जैसी बीमारियों की जांच होगी। अभी इन जांचों के लिए सैंपल लखनऊ समेत बड़े शहरों की प्रयोगशालाओं में भेजे जाते हैं, जिससे रिपोर्ट आने में कई दिन लग जाते हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि प्रयोगशाला का निर्माण पूरा होने के बाद जिले के मरीजों को आधुनिक जांच सुविधा जिला अस्पताल परिसर में ही उपलब्ध हो सकेगी।
एक हजार सैंपल जांचने की क्षमता
नई प्रयोगशाला में प्रतिदिन एक हजार से अधिक सैंपल जांचने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इससे मरीजों को रिपोर्ट जल्दी मिल सकेगी। फिलहाल जिला अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 250 सैंपल की जांच हो पाती है। संसाधन सीमित होने के कारण कई सैंपल बाहर भेजने पड़ते हैं। नई लैब शुरू होने पर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी राहत मिलेगी, क्योंकि कई जांचें निशुल्क होंगी।
निर्माण के बाद होगी तैनाती
प्रयोगशाला संचालन के लिए एक शिफ्ट में करीब 10 लैब टेक्नीशियन, पांच सहायक व चार सफाईकर्मियों की जरूरत होगी। हेमेटोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री व सेरोलॉजी के लिए एक चिकित्सक, एफएनएसी व माइक्रो बैक्टीरियोलॉजी के लिए अलग-अलग चिकित्सक और मॉलिक्यूलर जांच के लिए एक विशेषज्ञ की तैनाती प्रस्तावित है।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना के अंतर्गत करीब 80 लाख रुपये से जिला अस्पताल परिसर में 400 वर्गफीट क्षेत्रफल में आधुनिक पैथोलॉजी प्रयोगशाला का निर्माण हो रहा है। लैब के क्रियाशील होने पर मरीजों को पूरे सप्ताह तीन शिफ्ट में 24 घंटे जांच सुविधा उपलब्ध रहेगी। अभी जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में केवल सामान्य जांच ही हो पाती है। सेंट्रलाइज्ड पैथोलॉजी शुरू होने पर हेमेटोलॉजी के तहत सीबीसी, प्लेटलेट्स काउंट व हीमोग्लोबिन, बायोकैमिस्ट्री में एलएफटी, केएफटी व लिपिड प्रोफाइल और सेरोलॉजी में एचआईवी, हेपेटाइटिस व यौन जनित रोगों की जांच हो सकेगी।
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इसके साथ ही मॉलिक्यूलर बायोलॉजी में पीसीआर के माध्यम से संक्रमण की पुष्टि, माइक्रो बैक्टीरियोलॉजी में कल्चर व टीबी की जांच, क्लीनिकल पैथोलॉजी में यूरिन, स्टूल व सीमेन की जांच और एफएनएसी से शरीर में गांठ की जांच कर कैंसर संक्रमण की पुष्टि भी हो सकेगी। बीते करीब सात माह से लैब का निर्माण कार्य बीच में अटका था। जिससे सैंपल कलेक्शन व पंजीकरण काउंटर के अस्थायी स्थानों से संचालित होने से मरीजों और कर्मचारियों को भी काफी परेशानी उठाना पड़ रही है। शासन के निर्देश पर कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ ने लैब का निर्माण दोबारा शुरू किया है।
इन बीमारियों की होगी जांच
आधुनिक प्रयोगशाला में कैंसर, गुर्दा रोग, हृदय रोग, चिकनगुनिया, डेंगू, जापानी इंसेफेलाइटिस, एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम, कालाजार व स्क्रब टाइफस जैसी बीमारियों की जांच होगी। अभी इन जांचों के लिए सैंपल लखनऊ समेत बड़े शहरों की प्रयोगशालाओं में भेजे जाते हैं, जिससे रिपोर्ट आने में कई दिन लग जाते हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि प्रयोगशाला का निर्माण पूरा होने के बाद जिले के मरीजों को आधुनिक जांच सुविधा जिला अस्पताल परिसर में ही उपलब्ध हो सकेगी।
एक हजार सैंपल जांचने की क्षमता
नई प्रयोगशाला में प्रतिदिन एक हजार से अधिक सैंपल जांचने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इससे मरीजों को रिपोर्ट जल्दी मिल सकेगी। फिलहाल जिला अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 250 सैंपल की जांच हो पाती है। संसाधन सीमित होने के कारण कई सैंपल बाहर भेजने पड़ते हैं। नई लैब शुरू होने पर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी राहत मिलेगी, क्योंकि कई जांचें निशुल्क होंगी।
निर्माण के बाद होगी तैनाती
प्रयोगशाला संचालन के लिए एक शिफ्ट में करीब 10 लैब टेक्नीशियन, पांच सहायक व चार सफाईकर्मियों की जरूरत होगी। हेमेटोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री व सेरोलॉजी के लिए एक चिकित्सक, एफएनएसी व माइक्रो बैक्टीरियोलॉजी के लिए अलग-अलग चिकित्सक और मॉलिक्यूलर जांच के लिए एक विशेषज्ञ की तैनाती प्रस्तावित है।
