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Amethi News: बी-पैक्स समिति में 8.69 लाख का गबन, तत्कालीन सचिव पर प्राथमिकी दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 18 Feb 2026 12:38 AM IST
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अमेठी सिटी। बहादुरपुर ब्लॉक के मोहइया केसरिया गांव में बी-पैक्स समिति में 8.69 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। जांच में उर्वरक बिक्री के बाद धनराशि समिति के खाते में जमा नहीं किए की पुष्टि होने पर तत्कालीन सचिव राम बहादुर यादव को निलंबित कर दिया गया। जिलाधिकारी की अनुमति के बाद जायस कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज हुई है।
समिति स्तर पर उर्वरक की मांग प्रस्तुत न होने पर जुलाई 2025 में सहायक विकास अधिकारी सहकारिता सुखदेव प्रसाद ने अभिलेखों की जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में वित्तीय अनियमितता के संकेत मिले। विस्तृत जांच में पता चला कि उर्वरक बिक्री से प्राप्त पूरी रकम बैंक खाते में जमा नहीं हुई। 14 अगस्त 2025 को सचिव राम बहादुर यादव को निलंबित कर दिया गया। समिति की बहियां और निधियां अधिकृत सचिव मायाकांत पांडेय को सौंपी गईं। 19 अगस्त को कार्यभार हस्तांतरण के बाद अभिलेखों का मिलान आरंभ हुआ। 25 अगस्त की प्रारंभिक आख्या और आठ अक्तूबर की अंतिम रिपोर्ट में गबन की पुष्टि हुई।
रिपोर्ट के अनुसार बिक्री पंजिका में 12,73,325 रुपये की प्रविष्टि दर्ज है, जबकि बैंक खाते में 4,03,650 रुपये ही जमा पाए गए। 8,69,675 रुपये का अंतर सामने आया। संबंधित राशि जमा होने का कोई प्रमाण अभिलेखों में उपलब्ध नहीं मिला। लेखा परीक्षण में यह तथ्य भी सामने आया कि प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के अंतर्गत प्राप्त टेलीविजन वर्तमान सचिव को हस्तांतरित नहीं किया गया।
पूर्व प्रभारी सचिव को चार नोटिस भेजे गए। इसमें धनराशि जमा करने और उपकरण सुपुर्द करने का निर्देश दिया गया, मगर कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद पूरी रिपोर्ट जिलाधिकारी संजय चौहान को भेजी गई। अनुमति मिलने पर सहायक विकास अधिकारी ने जायस कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई। एसओ जायस अमरेंद्र सिंह ने बताया कि मामला दर्ज कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निलंबन के बाद रिकवरी प्रक्रिया शुरू
सहायक आयुक्त सहकारिता अरविंद कुमार यादव ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में आते ही सचिव को निलंबित किया गया। अभिलेखों की जांच में 8.69 लाख रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। प्रशासनिक अनुमति के बाद प्राथमिकी दर्ज हुई। सरकारी धन की वसूली नियमानुसार की जा रही है।
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समिति स्तर पर उर्वरक की मांग प्रस्तुत न होने पर जुलाई 2025 में सहायक विकास अधिकारी सहकारिता सुखदेव प्रसाद ने अभिलेखों की जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में वित्तीय अनियमितता के संकेत मिले। विस्तृत जांच में पता चला कि उर्वरक बिक्री से प्राप्त पूरी रकम बैंक खाते में जमा नहीं हुई। 14 अगस्त 2025 को सचिव राम बहादुर यादव को निलंबित कर दिया गया। समिति की बहियां और निधियां अधिकृत सचिव मायाकांत पांडेय को सौंपी गईं। 19 अगस्त को कार्यभार हस्तांतरण के बाद अभिलेखों का मिलान आरंभ हुआ। 25 अगस्त की प्रारंभिक आख्या और आठ अक्तूबर की अंतिम रिपोर्ट में गबन की पुष्टि हुई।
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रिपोर्ट के अनुसार बिक्री पंजिका में 12,73,325 रुपये की प्रविष्टि दर्ज है, जबकि बैंक खाते में 4,03,650 रुपये ही जमा पाए गए। 8,69,675 रुपये का अंतर सामने आया। संबंधित राशि जमा होने का कोई प्रमाण अभिलेखों में उपलब्ध नहीं मिला। लेखा परीक्षण में यह तथ्य भी सामने आया कि प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के अंतर्गत प्राप्त टेलीविजन वर्तमान सचिव को हस्तांतरित नहीं किया गया।
पूर्व प्रभारी सचिव को चार नोटिस भेजे गए। इसमें धनराशि जमा करने और उपकरण सुपुर्द करने का निर्देश दिया गया, मगर कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद पूरी रिपोर्ट जिलाधिकारी संजय चौहान को भेजी गई। अनुमति मिलने पर सहायक विकास अधिकारी ने जायस कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई। एसओ जायस अमरेंद्र सिंह ने बताया कि मामला दर्ज कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निलंबन के बाद रिकवरी प्रक्रिया शुरू
सहायक आयुक्त सहकारिता अरविंद कुमार यादव ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में आते ही सचिव को निलंबित किया गया। अभिलेखों की जांच में 8.69 लाख रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। प्रशासनिक अनुमति के बाद प्राथमिकी दर्ज हुई। सरकारी धन की वसूली नियमानुसार की जा रही है।
