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Amethi News: आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों की पहली पाठशाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 25 Mar 2026 12:25 AM IST
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गौरीगंज के जिला पंचायत रिसोर्स सेंटर में अमर उजाला फाउंडेशन के संवाद कार्यक्रम के बाद मौजूद आं
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अमेठी सिटी। गौरीगंज के जिला पंचायत रिसोर्स सेंटर में मंगलवार को आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी समस्याएं खुलकर सामने रखीं। बच्चों के बेहतर भविष्य और उनके विकास को लेकर कई अहम सुझाव भी दिए गए। बैठक में मानदेय, संसाधनों की कमी और बढ़ते कार्यभार को प्रमुख मुद्दों के रूप में उठाया गया।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शशि ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों की पहली पाठशाला हैं, इसलिए यहां का माहौल सीखने के अनुकूल होना चाहिए। जिम्मेदारियां बढ़ती जा रही हैं लेकिन मानदेय बहुत कम है। इससे आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने बच्चों को सरल भाषा में रोजमर्रा की जानकारी देने पर जोर दिया, जिससे उनकी समझ और जिज्ञासा बढ़े।
प्रतिमा ने कहा कि पोषण अभियान, टीकाकरण और सर्वे जैसे कई कार्य करने के बावजूद उचित पारिश्रमिक नहीं मिलता। उन्होंने केंद्रों पर अखबार उपलब्ध कराने का सुझाव दिया ताकि बच्चे चित्रों और सरल खबरों के माध्यम से नई चीजें सीख सकें और उनकी भाषा क्षमता विकसित हो। कुसुमलता मिश्रा ने बताया कि कई केंद्रों पर बैठने और खेलने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। बच्चों की गतिविधियों के लिए अलग स्थान और जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जाए तो उनका मानसिक और शारीरिक विकास बेहतर हो सकेगा।
मिथिलेश पांडेय ने कहा कि कार्यकर्ताओं पर कई तरह के काम का दबाव है, जिससे बच्चों पर पूरा ध्यान देना कठिन हो जाता है। उनका मानना है कि यदि कार्यभार कम किया जाए तो बच्चों को बेहतर तरीके से सिखाया जा सकता है। कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि कम मानदेय और भुगतान में देरी बड़ी समस्या है। उन्होंने मानदेय बढ़ाने और भुगतान समय पर करने की मांग की।
सीडीपीओ संतोष सिंह ने सभी सुझावों को ध्यान से सुना और कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समाज की मजबूत नींव तैयार कर रही हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी मुद्दों को उच्च स्तर तक पहुंचाया जाएगा और समाधान के प्रयास किए जाएंगे।
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शशि ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों की पहली पाठशाला हैं, इसलिए यहां का माहौल सीखने के अनुकूल होना चाहिए। जिम्मेदारियां बढ़ती जा रही हैं लेकिन मानदेय बहुत कम है। इससे आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने बच्चों को सरल भाषा में रोजमर्रा की जानकारी देने पर जोर दिया, जिससे उनकी समझ और जिज्ञासा बढ़े।
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प्रतिमा ने कहा कि पोषण अभियान, टीकाकरण और सर्वे जैसे कई कार्य करने के बावजूद उचित पारिश्रमिक नहीं मिलता। उन्होंने केंद्रों पर अखबार उपलब्ध कराने का सुझाव दिया ताकि बच्चे चित्रों और सरल खबरों के माध्यम से नई चीजें सीख सकें और उनकी भाषा क्षमता विकसित हो। कुसुमलता मिश्रा ने बताया कि कई केंद्रों पर बैठने और खेलने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। बच्चों की गतिविधियों के लिए अलग स्थान और जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जाए तो उनका मानसिक और शारीरिक विकास बेहतर हो सकेगा।
मिथिलेश पांडेय ने कहा कि कार्यकर्ताओं पर कई तरह के काम का दबाव है, जिससे बच्चों पर पूरा ध्यान देना कठिन हो जाता है। उनका मानना है कि यदि कार्यभार कम किया जाए तो बच्चों को बेहतर तरीके से सिखाया जा सकता है। कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि कम मानदेय और भुगतान में देरी बड़ी समस्या है। उन्होंने मानदेय बढ़ाने और भुगतान समय पर करने की मांग की।
सीडीपीओ संतोष सिंह ने सभी सुझावों को ध्यान से सुना और कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समाज की मजबूत नींव तैयार कर रही हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी मुद्दों को उच्च स्तर तक पहुंचाया जाएगा और समाधान के प्रयास किए जाएंगे।