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जनवरी 2023 में सेना को मिलेगी एके-203 राइफल
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गौरीगंज : मुंशीगंज स्थित आयुध निर्माण फैक्टरी। -संवाद
- फोटो : AMETHI
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गौरीगंज (अमेठी)। मुंशीगंज स्थित आयुध निर्माणी परियोजना में एके-203 राइफल बनाने का काम इस वर्ष के अंत तक शुरू हो जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि यह अत्याधुनिक राइफल जनवरी-2023 में सेना के हाथों में होगी। कुछ दिन पूर्व हुए डिफेंस एक्सपो में इसकी झलक भी दिख चुकी है।
अमेठी के कोरवा में एके-203 फैक्टरी का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन मार्च 2019 को जिले के कौहार स्थित विशाल मैदान में किया था। इस कार्यक्रम में तत्कालीन रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी मौजूद थीं। शिलान्यास के मौके पर पीएम ने बताया था कि मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत अमेठी के कोरवा में स्थापित हो रहे इंडो रशियन संयुक्त उपक्रम में सात लाख अत्याधुनिक एके-203 राइफलों का निर्माण होगा। इतनी बड़ी संख्या मेें राइफलों का निर्माण आगामी 10 सालों में किया जाना है।
शिलान्यास के बाद पहले यह कार्य ओएफबी यानी आयुध निर्माणी बोर्ड और क्लाशनिकोव के जिम्मे था। अब यह बोर्ड कॉरपोरेट हो गया है। मौजूदा समय में एके-203 राइफल तैयार करने की जिम्मेदारी भारत के दो निजी उपक्रम और रूस के क्लाशनिकोव व रोसोबोरान एक्सपोर्ट को दी गई है। बताया जा रहा है कि राइफल निर्माण के लिए पहले रूस के द्वारा पार्ट भेजे जाएंगे, बाद में इन्हें कोरवा में असेंबल किया जाएगा। बाद में पूरी राइफल यहीं बनाई जाएगी।
इस तरह से यह हथियार पूरी तरह से स्वदेशी प्रणाली पर आधारित होगा। आयुध निर्माणी परियोजना के कार्यकारी निदेशक हितेंद्र सिंह ने बताया कि यूक्रेन-रूस में चल रहे युद्ध के चलते इसमें काफी विलंब हुआ है। अब सब कुछ लगभग फाइनल है। इस साल के अंत में राइफल बनाने का काम शुरू हो जाएगा। आयुध निर्माणी के कार्य प्रबंधक मोहित यादव ने बताया कि प्रोजेक्ट के सीईओ मेजर जनरल राजीव सेंगर जल्दी ही यहां आने वाले हैं। इसके बाद काम शुरू होने की उम्मीद है।
आयुध निर्माणी परियोजना कोरवा में फिलहाल फायर गन के साथ ही त्रिचि असॉल्ट रायफल (टार) के पार्ट का निर्माण किया जा रहा है। यह पार्ट त्रिचिरापल्ली स्थित फैक्टरी में जाकर असेंबल किए जाते हैं।
गुजरात के गांधीनगर में 18 से 22 अक्तूबर तक चले डिफेंस एक्सपो में एके-203 का प्रदर्शन किया गया। इस एक्सपो में अमेठी में निर्मित 12 बोर पंप गन भी रखी गई। कार्यकारी निदेशक ने बताया कि पंप गन का इस्तेमाल भीड़ को नियंत्रित करने में किया जाता है। इस गन में पांच कारतूस आते हैं।
मोहित यादव ने बताया कि एक्सपो में श्रीलंका के रक्षा मंत्री प्रेमिथा बंडारा टेनाकुन से उन्होंने मुलाकात की और इस हथियार के बारे में जानकारी दी। कुछ अन्य देशों ने भी इसमें रुचि दिखाई है।
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अमेठी के कोरवा में एके-203 फैक्टरी का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन मार्च 2019 को जिले के कौहार स्थित विशाल मैदान में किया था। इस कार्यक्रम में तत्कालीन रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी मौजूद थीं। शिलान्यास के मौके पर पीएम ने बताया था कि मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत अमेठी के कोरवा में स्थापित हो रहे इंडो रशियन संयुक्त उपक्रम में सात लाख अत्याधुनिक एके-203 राइफलों का निर्माण होगा। इतनी बड़ी संख्या मेें राइफलों का निर्माण आगामी 10 सालों में किया जाना है।
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शिलान्यास के बाद पहले यह कार्य ओएफबी यानी आयुध निर्माणी बोर्ड और क्लाशनिकोव के जिम्मे था। अब यह बोर्ड कॉरपोरेट हो गया है। मौजूदा समय में एके-203 राइफल तैयार करने की जिम्मेदारी भारत के दो निजी उपक्रम और रूस के क्लाशनिकोव व रोसोबोरान एक्सपोर्ट को दी गई है। बताया जा रहा है कि राइफल निर्माण के लिए पहले रूस के द्वारा पार्ट भेजे जाएंगे, बाद में इन्हें कोरवा में असेंबल किया जाएगा। बाद में पूरी राइफल यहीं बनाई जाएगी।
इस तरह से यह हथियार पूरी तरह से स्वदेशी प्रणाली पर आधारित होगा। आयुध निर्माणी परियोजना के कार्यकारी निदेशक हितेंद्र सिंह ने बताया कि यूक्रेन-रूस में चल रहे युद्ध के चलते इसमें काफी विलंब हुआ है। अब सब कुछ लगभग फाइनल है। इस साल के अंत में राइफल बनाने का काम शुरू हो जाएगा। आयुध निर्माणी के कार्य प्रबंधक मोहित यादव ने बताया कि प्रोजेक्ट के सीईओ मेजर जनरल राजीव सेंगर जल्दी ही यहां आने वाले हैं। इसके बाद काम शुरू होने की उम्मीद है।
आयुध निर्माणी परियोजना कोरवा में फिलहाल फायर गन के साथ ही त्रिचि असॉल्ट रायफल (टार) के पार्ट का निर्माण किया जा रहा है। यह पार्ट त्रिचिरापल्ली स्थित फैक्टरी में जाकर असेंबल किए जाते हैं।
गुजरात के गांधीनगर में 18 से 22 अक्तूबर तक चले डिफेंस एक्सपो में एके-203 का प्रदर्शन किया गया। इस एक्सपो में अमेठी में निर्मित 12 बोर पंप गन भी रखी गई। कार्यकारी निदेशक ने बताया कि पंप गन का इस्तेमाल भीड़ को नियंत्रित करने में किया जाता है। इस गन में पांच कारतूस आते हैं।
मोहित यादव ने बताया कि एक्सपो में श्रीलंका के रक्षा मंत्री प्रेमिथा बंडारा टेनाकुन से उन्होंने मुलाकात की और इस हथियार के बारे में जानकारी दी। कुछ अन्य देशों ने भी इसमें रुचि दिखाई है।