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Amethi News: गायत्री साधना से होता है सर्वांगीण विकास
Sat, 01 Aug 2026 12:53 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 01 Aug 2026 12:53 AM IST
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गायत्री शक्तिपीठ अमेठी में साधना करते साधक। स्रोत: गायत्री परिवार
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अमेठी। गायत्री शक्तिपीठ में चल रहे 40 दिवसीय गायत्री महामंत्र अनुष्ठान के दूसरे दिन शुक्रवार को व्यवस्थापक डॉ. त्रिवेणी सिंह ने साधकों को गायत्री मंत्र के महत्व और उसके आध्यात्मिक प्रभाव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नियमित गायत्री साधना व्यक्ति के भीतर नई चेतना, ऊर्जा और आत्मबल का संचार करती है। इससे व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होता है और जीवन सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों में दिव्य शक्तियों के जागरण की क्षमता निहित है। प्रत्येक अक्षर किसी न किसी श्रेष्ठ सद्गुण का प्रतिनिधित्व करता है, जो साधक के जीवन में ओज, तेज, वर्चस्व, शालीनता, सज्जनता, विशिष्टता, भलमनसाहत और सद्बुद्धि जैसे गुणों का विकास करता है। उन्होंने कहा कि केवल दैनिक उपासना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जीवन साधना और लोकमंगल की भावना को भी व्यवहार में उतारना आवश्यक है। कार्यक्रम में शकुंतला पांडेय, कुसुम शर्मा, शीला जायसवाल, सुनीता सिंह, सुधा गुप्ता, दिनेश सिंह, डॉ. धर्मेंद्र कुमार तिवारी आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों में दिव्य शक्तियों के जागरण की क्षमता निहित है। प्रत्येक अक्षर किसी न किसी श्रेष्ठ सद्गुण का प्रतिनिधित्व करता है, जो साधक के जीवन में ओज, तेज, वर्चस्व, शालीनता, सज्जनता, विशिष्टता, भलमनसाहत और सद्बुद्धि जैसे गुणों का विकास करता है। उन्होंने कहा कि केवल दैनिक उपासना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जीवन साधना और लोकमंगल की भावना को भी व्यवहार में उतारना आवश्यक है। कार्यक्रम में शकुंतला पांडेय, कुसुम शर्मा, शीला जायसवाल, सुनीता सिंह, सुधा गुप्ता, दिनेश सिंह, डॉ. धर्मेंद्र कुमार तिवारी आदि मौजूद रहे।
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