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Amethi News: 19 दिन बाद गांव पहुंचा जावेद का शव
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 11 Apr 2026 12:22 AM IST
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जगदीशपुर। कठौरा गांव निवासी जावेद अहमद (48) का शव 19 दिन बाद शुक्रवार को सऊदी अरब से गांव पहुंचा। जैसे ही शव घर पहुंचा, परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। रिश्तेदार और ग्रामीण बड़ी संख्या में जुट गए। देर शाम नम आंखों के बीच उन्हें सुपुर्दे खाक कर दिया गया।
परिजनों के अनुसार जावेद अहमद सऊदी अरब में ट्रक चालक के रूप में काम करते थे। 13 मार्च को ट्रक की मरम्मत के दौरान एक अन्य वाहन की चपेट में आ गए। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान 22 मार्च की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। मौत की सूचना मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
परिजनों ने विदेश मंत्रालय से संपर्क कर शव को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कराई। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शुक्रवार को शव गांव पहुंच सका। शव के घर पहुंचते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। हर कोई गमगीन नजर आया। परिजन बार-बार जावेद को याद कर बिलखते रहे।
10 मार्च को आखिरी बार हुई थी बात
जावेद का शव देखते ही मां रब्बुल निशा बेसुध हो गईं। पत्नी शमाबानो का रो-रोकर बुरा हाल रहा। बेटियां सना, सादिया, आलिया और अल्फिसा तथा बेटा नावेद फूट-फूटकर रो पड़े। नावेद ने बताया कि 13 मार्च की रात करीब 10 बजे पिता से आखिरी बार बात हुई थी। उस समय उन्होंने ईद की तैयारियों के बारे में पूछा और जल्द घर आने तथा पैसे भेजने का भरोसा दिलाया था। परिवार को उम्मीद थी कि इस बार ईद साथ मनाई जाएगी, लेकिन अब केवल यादें रह गईं।
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परिजनों के अनुसार जावेद अहमद सऊदी अरब में ट्रक चालक के रूप में काम करते थे। 13 मार्च को ट्रक की मरम्मत के दौरान एक अन्य वाहन की चपेट में आ गए। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान 22 मार्च की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। मौत की सूचना मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
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परिजनों ने विदेश मंत्रालय से संपर्क कर शव को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कराई। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शुक्रवार को शव गांव पहुंच सका। शव के घर पहुंचते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। हर कोई गमगीन नजर आया। परिजन बार-बार जावेद को याद कर बिलखते रहे।
10 मार्च को आखिरी बार हुई थी बात
जावेद का शव देखते ही मां रब्बुल निशा बेसुध हो गईं। पत्नी शमाबानो का रो-रोकर बुरा हाल रहा। बेटियां सना, सादिया, आलिया और अल्फिसा तथा बेटा नावेद फूट-फूटकर रो पड़े। नावेद ने बताया कि 13 मार्च की रात करीब 10 बजे पिता से आखिरी बार बात हुई थी। उस समय उन्होंने ईद की तैयारियों के बारे में पूछा और जल्द घर आने तथा पैसे भेजने का भरोसा दिलाया था। परिवार को उम्मीद थी कि इस बार ईद साथ मनाई जाएगी, लेकिन अब केवल यादें रह गईं।